Homeहमर बिलासपुरमौसम के बदलते मिजाज़ और उत्पादन को लेकर किसानों के मन में...

मौसम के बदलते मिजाज़ और उत्पादन को लेकर किसानों के मन में उठ रहे प्रश्नों पर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने दी आवश्यक जानकारी और सुझाव।

बारिश होने से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं वही अधिक उत्पादन को लेकर किसानों के मन में बहुत सारे प्रश्न है, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक ने बताया कि उत्पादन बढ़ाने के लिए हरी खाद का उपयोग बहुत ही फायदेमंद साबित हो रही है। यह पूरी तरह से प्राकृतिक है, इसे खेतों में ही किसान तैयार कर सकते हैं, 20 से 25 दिन के अंदर ही हरी खाद तैयार होती है और जुताई से पहले इस हरी खाद को खेतों में डाल दिया जाता है, जिसे देचा या सनाई कहा जाता है, यह घास का ही एक रूप है, यह फ्री में किसानों को प्राप्त होता है।

महंगे रासायनिक खाद और उर्वरक से स्वास्थ्य और खेतों को भी नुकसान होता है, जबकि हरी खाद के रुप मे पाया जाने वाला खाद फ्री में प्राकृतिक जैविक खाद हैं जो आर्थिक बचत के साथ स्वास्थ्य और खेत के लिए भी हितकर है। जिससे उत्पादन भी बढ़ता है इसके उपयोग से उर्वरक या रासायनिक खाद का प्रयोग नहीं के बराबर करना होता है। हरी खाद के फायदे को लेकर विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक से जी न्यूज़ की खास बातचीत में उन्होंने किसानों की दूसरी समस्या का भी निराकरण चैनल के जरिए किया है।

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