बरसात आते ही डायरिया ने पैर पसारना शुरू कर दिया है, शहरी इलाके सहित ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसके मरीज मिलने शुरू हो गए हैं, साफ सफाई के अभाव के चलते यह समस्या बनी हुई है वहीं दूषित पेयजल से भी जल जनित संक्रमित बीमारियां तेजी से बढ़ती जा रही है, शहरी इलाके के बाद अब रतनपुर में डायरिया के मरीज मिले हैं, जिससे जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है, मंगलवार को स्वास्थ्य अधिकारी और कलेक्टर ने दौरा कर मरीजों से हाल-चाल जाना और व्यवस्था सुधारने निर्देश दिए हैं।



मंगलवार को कलेक्टर अवनीश शरण ने रतनपुर के डायरिया प्रभावित इलाके का दौरा किया। उन्होंने पीड़ित परिवारों के घर पहुंचकर उनसे मुलाकात की। उनसे चर्चा कर जानना चाहा कि आखिर इलाका विशेष में ही डायरिया का प्रकोप क्यों हुआ। रतनपुर का महामाया वार्ड क्र 3 में डायरिया के ज्यादा मरीज मिले है। कलेक्टर ने अस्पताल में भर्ती मरीजों से भी भेंटकर उपचार व्यवस्था का जायजा लिया। चिकित्सकों को इनका अच्छे से इलाज करने के निर्देश दिए।उन्होंने आम नागरिकों को भी सचेत किया है। साफ पानी और स्वच्छता पर विशेष ध्यान रखने की अपील की है। कलेक्टर ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में पाइपलाइन नालियों से होकर गुजर रही है, तो वहीं कई लोगों ने क्षतिग्रस्त प्लास्टिक के पाइप को लाइन में जोड़कर अपने घर टुल्लू पंप का कनेक्शन लिया है, जिस वजह से यह पानी प्रदूषित हुआ है। कलेक्टर ने पाइपलाइन को ऊपर उठाने और जर्जर पाइपलाइन को बदलने के निर्देश दिए हैं।


अब तक 36 मरीजों की पहचान हो चुकी है, जिनमें से तीन को सिम्स में भर्ती किया गया था। फिलहाल 24 मरीजों का इलाज सामुदायिक अस्पताल में जारी है, सभी के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा हैं। कलेक्टर और स्वास्थ्य अधिकारी दौरा के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों को रतनपुर के सभी वार्डों के घर-घर पहुंचकर मरीजों के सर्वे करने के निर्देश दिए। इसके बाद स्वास्थ्य और नगरीय निकाय मिलकर सर्वे कार्य करेंगे। उन्हेांने कहा कि कही भी डायरिया के लक्षण मिले तो उन्हें अस्पताल में भर्ती कर इलाज कराएं। निरीक्षण के बाद कलेक्टर ने अस्पताल में बैठक लेकर स्वास्थ्य, राजस्व एवं नगर पालिका अधिकारी को आपसी तालमेल के साथ सतत निगरानी रखने के निर्देश दिए। स्थानीय तहसीलदार को सभी मरीजों के ठीक होने तक मुख्यालय नहीं छोड़ने को कहा है।







