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राज किशोर नगर में काम कर रहे मजदूर आये 11 केवी करेंट की चपेट में, एक की मौत, दूसरा झुलसा।

थाना सरकंडा अंतर्गत राजकिशोर नगर के निर्माणाधीन मकान में हाईटेंशन करेंट के बीच सुरक्षा के आभाव में काम कर रहे दो मजदूरों को जोरदार करेंट का झटका लगा। करेंट का झटका लगने से और ऊंचाई से गिरने की वजह से एक की मौत हो गयी जबकि दूसरा मजदूर घायल है, जिसका सिम्स में उपचार जारी है।

नवीन कानून क्रियान्वयन उत्सव के दौरान सरकंडा थाना में उस समय हड़कम्प मच गया, जब सरकंडा पुलिस को पता चला कि करेंट के चपेट में आने से एक मजदूर की मौत हो गयी और दूसरा गम्भीर रूप से घायल है। ठेकेदार और वहां मौजूद अन्य लोग दोनों मजदूरों को सिम्स लेकर पहुंचे।जहां चिकित्सकों ने एक को मृत घोषित कर दिया जबकि गम्भीर रूप से घायल दूसरे मजदूर को इलाज के लिए सिम्स में भर्ती किया गया। मृतक के परिजनों को जैसे ही इसकी सूचना मिली वे भागे दौड़े सिम्स पहुंचे और ठेकेदार एवं मकान मालिक को मौत का जिम्मेदार बताते हुए इसकी सूचना देने थाना सरकंडा पहुंचे। नवीन कानून उत्सव कार्यक्रम की व्यस्तता के बीच सूचना पाकर आनन फानन में सिम्स पहुंची सरकंडा पुलिस ने गंभीर रूप से घायल मरीज का बयान लेकर और मृत मजदूर के शव का मर्ग कायम कर शव पोस्टमार्टम कार्यवाही करने के बाद मामले को विवेचना में लिया है।

दरअसल सरकंडा थाना क्षेत्र अंतर्गत राजकिशोर नगर निवासी रोशन सिंह के मकान के ऊपरी माले पर शेड निर्माण का काम चल रहा था। वहीं से 11केवी का हाईटेंशन करेंट का तार भी बगल से गुजर रहा था। चुकी दयालबंद निवासी 24 वर्षीय उमेश यादव और अकलतरा कोटमी सोनार निवासी 40 वर्षीय अशोक दास मानिकपुरी नामक दो मजदूर देख रेख एवं सुरक्षा के आभाव में हाईटेंशन तार के पास ही काम कर रहे थे। तभी दोनों को जोरदार करेंट का झटका लगा, इसी बीच करेंट का झटका लगने से उमेश यादव मकान के ऊपरी माले से सीधे जमीन पर नीचे गिर पड़ा और मौके से ही उसकी मौत हो गयी जबकि अशोक दास मानिकपुरी गम्भीर रूप से घायल हो गया।फिलहाल शिकायत के आधार पर सरकंडा पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है।

गौरतलब है कि किसी निर्माणाधीन मकान में सुरक्षा के आभाव में लापरवाही पूर्वक काम कराने के चलते किसी मजदूर की मौत हो जाने की यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि इस तरह की घटनाएं आम हो गई है। जिसका जिम्मेदार भी कहीं ना कहीं प्रशासन और श्रम विभाग ही है। जो आजतक किसी भी स्पॉट पर जाकर यह जांच पड़ताल नही करता कि आखिर मजदूरों से किस तरह काम लिया जा रहा है। यही वजह है कि ठेकेदार और बड़े बिल्डरों के द्वारा नियम कायदों को ताक में रखकर सुरक्षा के अभाव में 200 से 300 रु की मजदूरी करने वाले मजदूरों को सुरक्षा के अभाव में जान जोखिम में डलवा कर बड़े से बड़ा काम करवाया जाता हैं। यही वजह है कि ऐसे मजदूरों के साथ इस तरह का हादसा होना आम हो गया है। फिलहाल मृतक और घायल मजदूर के परिजनों के आरोप के अनुसार सरकंडा पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है। पुलिस से उम्मीद जताई जा रही है कि पुलिस इस मामले में दोषियों पर सख्त कार्यवाही करेगी।

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