राशन कार्ड बनाने के मामले में खाद्य विभाग ने अपने अधिकारियों और बाबू को एक तरह से बचा लिया है। पूरा ठीकरा एक सेल्समैन पर फोड़ते हुए जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी गई है। दरअसल पूरा मामला एपीएल से बीपीएल कार्ड बनाने का था, लेकिन इसे राशन वितरण में गड़बड़ी का बना दिया गया और उसी आधार से जांच भी की गई। हितग्राहियों के नाम पर बीपीएल कार्ड बने हैं, उनका बयान लिया गया। जानकारी के मुताबिक 20 से अधिक हितग्राहियों ने स्वीकार किया है कि उन्होंने शिविर में पार्षद, खाद्य और निगम के अधिकारियों के माध्यम से बीपीएल कार्ड बनवाया है।



हालांकि 3 हितग्राहियों ने यह बयान दिया कि बीपीएल कार्ड होने के बाद भी सेल्समैन ने पैसे लेकर उन्हें राशन दिया। जोन आफिस की अनुशंसा के आधार पर बीपीएल कार्ड बनवाए गए हैं। जांच में इसकी गड़बड़ी नहीं पाई गई। कुछ हितग्राहियों द्वारा यह दस्तावेज जरूर पेश किए गए कि बीपीएल कार्ड होने के बाद भी उनसे पैसे लेकर राशन दिए गए। खाद्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आगे भी जांच जारी है और ऐसे संदिग्ध कार्डो की जांच की जाएगी।


