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रेलवे अप्रेंटिस की मौत के दूसरे दिन भी साथियों ने मचाया हंगामा, रेलवे अस्पताल का कर दिया घेराव।

बीसीएन डिपो में अप्रेंटिस की मौत को लेकर अब तक तनाव का माहौल है। रेलवे की कार्यप्रणाली से नाराज अन्य अप्रेंटिस अपनी मांगों पर अड़े है। मृतक के परिजनों के साथ अधिकारी ने बात कर उचित मुआवजा और जाँच के बाद नोकरी देने का आश्वासन दिया है।

बिलासपुर जोन के बीसीएन यार्ड में प्रशिक्षु अप्रेन्टिस महाराष्ट्र के जलगांव निवासी प्रसाद गजानन काले की करंट लगने से मौत हो गई। इस घटना के लिए रेल प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे अप्रेंटिस काफी नाराज है। घटना वाले दिन जमकर हंगामा किया और मृतक के परिवार को मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग पर अड़े रहे। उम्मीद थी कि रेलवे उनकी मांग पर ठोस निर्णय लेगा लेकिन, रेलवे ने मुआवजा तो दूर आश्वसन तक नहीं दिया। इसके चलते रेलवे के 250 से अधिक प्रशिक्षु अप्रेन्टिस ने अगले दिन मंगलवार को रेलवे अस्पताल के घेराव करने पहुंच गए ।किसी तरह का विवाद या तोड़फोड़ न हो जाए। इस भय से जीएम और डीआरएम कार्यालय के सामने भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया है। इसके अलावा अस्पताल परिसर में भी रेल सुरक्षा बल के जवानों को सुरक्षा मे लगा दिया है। जवानो ने प्रदर्शनकारीयों को अस्पताल के बाहर कर गेट बंद कर दिया। इस पर प्रशिक्षु अस्पताल के सामने सड़क पर बैठ गए।

साथी की मौत के लिए रेलवे प्रबंधन को जिम्मेदार मान रहे प्रशिक्षुओं की मांग पर एडीआरएम, सीनियर डीसीएम समेत अन्य अधिकारी मौके पर पहुँचे, और मृतक के परिजनों से बात कर उन्हें उचित मुआवजा और जाँच के बाद नोकरी देने की बात कही है।
संतोषजनक जवाब मिलने पर सभी शांत हुए। जिसके बाद परिजनों की उपस्थिति में पोस्टमार्टम के लिए शव जिला अस्पताल भिजवा दिया। वही परिजनों ने भी अधिकारियों के आश्वासन पर सहमति जताई है।

इस घटना से न केवल बिलासपुर बल्कि, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के विभिन्न विभागों मे प्रशिक्षण ले रहे अप्रेंटिस अलग अलग शहरों से बुधवार सुबह से बिलासपुर पहुंच गए। सभी घटना के विरोध का समर्थन कर रहे थे। उनका कहना है कि घटना केवल रेलवे की लापरवाही की वजह से हुई है। इस मामले में रेलवे के अधिकारियों और जिला और पुलिस प्रशासन के अधिकारियों के समझाइए के बाद मृतक के परिजन तो मान गए।लेकिन अप्रेंटिस के प्रशिक्षु कर्मचारी अपनी सुरक्षा की मांग को लेकर पड़े हुए थे जिन्हें पुलिस प्रशासन के द्वारा समझाइए देते हुए खदेड़ कर रेलवे अस्पताल के बाहर से हटाया गया। बताया जा रहा है कि वर्तमान में करीब 1100 अप्रेंटिस अलग-अलग विभागों में प्रशिक्षण हासिल कर रहे हैं। इन्हें 1 साल के प्रशिक्षण के बाद जो अंक मिलता है, रेलवे भर्ती में उसका अतिरिक्त लाभ प्राप्त होता है।

इस दौरान इन अप्रेंटिस को ₹7000 प्रतिमाह दिया जाता है, लेकिन आरोप है कि आरामतलब कर्मचारी खुद तो आराम फरमाते हैं और इन अप्रशिक्षित कर्मचारियों से जोखिम का काम लेते हैं। अपने साथी की मौत के बाद यह सभी अपने लिए बेहतर सुरक्षा इंतजाम और सुविधाएं मांग रहे हैं, लेकिन अपनी मांग मनवाने के लिए जिस तरफ से इन्होंने रेलवे अस्पताल के मुख्य द्वार पर धरना प्रदर्शन कर मरीजो को परेशान किया उसे उचित नहीं कहा जा सकता, वही इन लोगों ने नियम विरुद्ध सड़क पर चक्का जाम भी किया, जिस पर पुलिस चाहे तो उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही भी कर सकती है।

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