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लाला लाजपत राय आत्मानंद स्कूल खपरगंज में कक्षा 11 वीं कॉमर्स में 49 छात्र-छात्राओं में से 21 बच्चे फेल होने के संदर्भ में कलेक्टर और शिक्षा विभाग को ज्ञापन सौंपने के बाद कॉपी की दोबारा जांच शुरू..

आत्मानंद स्कूलों में बच्चों को दी जा रही शिक्षा पर अब सवाल उठने लगे हैं। यहां पढ़ाई का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। यही वजह है कि वार्षिक परीक्षा परीणाम में लाला लाजपत राय आत्मानंद स्कूल खपरगंज में कक्षा 11 वीं कॉमर्स में 49 छात्र-छात्राओं में से केवल 19 ही पास हुए हैं। वहीं 21 बच्चे फेल हो गए हैं। ऐसे में अब स्कूल की पढ़ाई पर सवालिया निशान लग रहा है। जी न्यूज में खबर प्रसारण के बाद स्कूल शिक्षा विभाग हरकत में आया, फेल छात्रों को बुलाकर कॉपी जांच कराई जा रही हैं।

ग्यारहवी कॉमर्स के स्टूडेंट चार से पांच विषय में फेल हुए हैं, जिनके द्वारा फिर से उत्तर पुस्तिका जांच की मांग की जा रही हैं। बच्चों के साथ ही छात्र संगठनो ने इस मुद्दे को लेकर कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी से इस स्कूल में वार्षिक परीक्षा के दौरान छात्रों के हल किए हुए उत्तर पुस्तिका की पुनः जांच कराने ज्ञापन दिया है। हाल ही में हुए वार्षिक परीक्षा के परीणाम स्कूल प्रबंधन ने जारी किया है। ऐसे में यहां 70 प्रतिशत बच्चे फेल हो गए हैं। इसमें ज्यादातर बच्चे तीन से चार विषय में फेल हैं। जी न्यूज में खबर दिखाई गई, इसे संझन में लेते हुए शिक्षा विभाग ने स्कूल को सभी 21 फेल छात्रों को कॉपी दिखाने निर्देश दिये, मंगलवार को सभी विद्यार्थियों को बुलाकर उत्तरपुस्तिका दिखाई, गई स्कूल के प्राचार्य ने बताया कि छात्रसंघ पास करने दबाव बना रहे है।

अभिभावकों का कहना है स्कूल की पढ़ाई कमजोर होने के चलते बच्चे का शिक्षा का स्तर नीचे गिर रहा है।टीचर पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे रहे, यह हाल केवल खपरगंज स्कूल का ही नहीं बल्कि अन्य स्कूलों का भी है जहां का रिजल्ट इस तरह खराब आया है। ऐसे में स्कूल में पढ़ाई के स्तर को लेकर अब अभिभावक भी चिंतित हैं। स्वामी आत्मानंद स्कूल में हस्तलिखित प्रश्न-पत्र का विरोध करना सेजेस खपरगंज के 11वीं कक्षा के छात्रों को महंगा पड़ गया। छात्र संघ का कहना है स्कूल प्रबंधन ने अच्छा पेपर बनाने के बाद भी 49 छात्रों में से 21 छात्रों को फेल कर दिया। इसके विरोध में छात्र कलेक्टर के पास एनएसयूआई के नेतृत्व में पहुंचे। जहां उन्होंने उनको फेल करने की जांच कराने की बात कहीं। साथ ही उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन की मांग की गई।

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