राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होने पर कॉलेज में सबसे पहली शर्त नियमित प्रोफेसर लैब, लाइब्रेरी की है लेकिन जिले के अधिकांश कॉलेजों में इस नियम का पालन नहीं किया जा रहा है, सरकारी सहित निजी कॉलेजों में भी यही स्थिति बनी हुई है, यहां नियमित प्रोफेसर नहीं है लैब लाइब्रेरी की सुविधा नहीं है। इसके बावजूद भी विश्व विश्वविद्यालय प्रबंधन ऐसे निजी कॉलेजों पर कोई कार्यवाही नहीं कर रहा है, जिससे छात्रों का भविष्य अधर में लटक सकता है

शहर में ही पंजाबी कॉलोनी स्थित शांतिनिकेतन महाविद्यालय में विश्वविद्यालय के नियम की धज्जियां उड़ाई जा रही है। छोटे-छोटे कमरों में कॉलेज संचालित किया जा रहा हैं, यहां खेल मैदान सहित जरूरी सुविधाओं का जबरदस्त अभाव बना हुआ है, साथ ही शांति निकेतन के नाम पर पास में ही स्कूल भी संचालित हो रहा है, दोनों संस्थाओं का एक ही डायरेक्टर है। कमाई के फेर में कॉलेज संचालक छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है, यहां बीए, बीएससी, बीकॉम, पीजीडीसीए जैसे कोर्स है। यहां तक की प्रिंसिपल ने भी माना कि यहां सुविधाओ का आभाव है।



कॉलेज में दो सौ से लेकर 300 तक स्टूडेंट हैं लेकिन बैठने के लिए छोटे-छोटे चार कमरे ही हैं, यह कॉलेज राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों को पूरा ही नहीं करते, इसके बाद भी नए सत्र के लिए एडमिशन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस कॉलेज में स्टूडेंट के बैठने की व्यवस्था से लेकर लैब लाइब्रेरी और नियमित टीचिंग स्टाफ भी नहीं है। एक्सपर्ट का कहना है कि ऐसी स्थिति में ऐसे कॉलेजों में एनपीए लागू हो ही नहीं सकता, साथ ही यहां प्रवेश लेने वाले छात्र एन पीए के तहत ऑप्शन विषय भी चयन नहीं कर पाएंगे, तमाम कमियों, अभाव के बाद भी अटल बिहारी विश्वविद्यालय प्रबंधन इस पर कोई कार्यवाही क्यों नहीं कर रहा यह समझ से परे है।


