लोकसभा चुनाव को लेकर निर्वाचन आयोग पूरी मुस्तैदी से भिड़ा हुआ है। मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक पहुंचाने के लिए प्रचार प्रसार तो कर ही रहा है, वही पीठासीन अधिकारियों को भी प्रशिक्षण के द्वारा शत प्रतिशत मतदान के लिए प्रेरित किया जा रहा है। चार दिवसीय मतदान प्रशिक्षण जिले में दो केंद्रों में दिया गया है। जिसमें लगभग 2000 मतदान अधिकारियों को छत्तीस मास्टर ट्रेनर द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान उन्हें वोटिंग मशीन और वीवीपेट की बारीकियां से अवगत कराया गया है।

निष्पक्ष और पारदर्शी मतदान लोकतंत्र का आधार होता है, इसके लिए निर्वाचन आयोग पूरी तरह से तैयार है। सबसे ज्यादा भूमिका मतदान केंद्रों में मतदान अधिकारियों, कर्मियों का होता है। जहां मतदाता मतदान प्रक्रिया का प्रयोग, इनके निर्देशों पर करते हैं ।स्याही लगाने से लेकर वोट डालने तक की प्रक्रिया में मतदान अधिकारियों का अहम रोल होता है, वही वोटिंग मशीन और बीवीपेट के संचालन की जानकारी होना अधिकारियों के लिए आवश्यक है ।जिसे लेकर चार दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन जिले के दो स्कूलों में किया गया, यहां मतदान अधिकारियों को मशीनों की बारीकी समझाई गई। मास्टर ट्रेनर ने बताया कि मतदान के दौरान किस-किस समस्या का सामना होता है, उससे निपटने किस प्रकार की तैयारी आवश्यक है और इस दौरान यदि मशीनों में कोई गड़बड़ी नजर आए तो उसका समाधान किस प्रकार करना है। इसका डेमोस्ट्रेशन के जरिये जानकारी दी गई।



लगातार मतदान अधिकारियों को प्रशिक्षण देने का दौर चल रहा है, कुछ अधिकारी कर्मचारी जो छूट गए थे उनका भी प्रशिक्षण इन चार दिवसीय कार्यशाला में दिया गया। बेलतरा क्षेत्र का प्रशिक्षण लाल बहादुर शास्त्री स्कूल में दिया गया तो वहीं बिलासपुर क्षेत्र के अधिकारियों का प्रशिक्षण दयालबंद के गवर्नमेंट स्कूल में दिया गया है। यहां चार दिवसीय प्रशिक्षण का समापन रविवार को हुआ। इस दौरान प्रशिक्षण अधिकारियों ने बताया की प्रतिदिन 500 मतदान अधिकारी प्रशिक्षण लेने पहुंचते थे, इस प्रकार कुल 2000 अधिकारियों को मशीनों की बारीकी से प्रशिक्षित किया गया ।जिसके लिए 36 ट्रेनर और सहायक ट्रेनर ने अपनी सेवाएं दी। इस दौरान सभी मतदान कर्मी और अधिकारी प्रशिक्षण स्थल पर मौजूद रहे और मशीनों की बारीकी और मतदान प्रक्रिया को समझा।


