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लोगों के विरोध के बाद आखिरकार वन विभाग ने लिया अपना तुगलकी फरमान वापस, अब पालतू तोता को कानन में नहीं करना होगा जमा।

वन विभाग के द्वारा तोता सहित अन्य वन्य पक्षियों को पालने पर लगाए गए प्रतिबंध को केंद्रीय वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के निर्देश पर स्थगित कर दिया गया है हालांकि अबतक डिवीजन मुख्यालय से इसको लेकर किसी तरह का कोई आदेश जारी नही हुआ है। इसलिए अब भी शहरवासी संशय में है और अब भी शहरवासी तोता को कानन जू में जमा करने से इनकार कर रहे हैं।

केंद्रीय वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के निर्देश पर भले ही तोता पालने पर लगाये गए प्रतिबंध को स्थगित कर दिया गया है लेकिन आज भी शहरवासी इसको लेकर असमंजस की स्थिति में है। वहीं केंद्रीय वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के निर्देश के बावजूद अबतक जिला मुख्यालय में भी अपनी ओर से जारी आदेशों पर किसी तरह का कोई संसोधन नही किया गया है।यही वजह है कि शहरवासी साफ तौर पर कह रहे है कि उनके द्वारा वर्षो से तोता को पाल पोसकर अच्छे से रखा गया है। उनसे सभी का बहुत ज्यादा लगाव भी बढ़ गया है तो फिर लोग कैसे उसे वन विभाग के हवाले कर दें। वन विभाग के द्वारा जारी किए गए अजीबोगरीब फरमान को लेकर ज़ी न्यूज़ ने पत्रकारों से लेकर तोता पालने वालों से भी चर्चा की सभी ने स्पष्ट कहा कि वे लोग वन विभाग से ज्यादा बेहतर अपने पालतू तोता को रख सकते हैं। वे किसी भी हाल में वन विभाग या फिर कानन पेंडारी को अपने तोता को नहीं सौंपेंगे।

कुछ ने कहा कि वन विभाग तोता को आजाद देखना चाहता है तो वह पहले खुद उनके द्वारा कैद किए गए कानून जू से तोता को आजाद करे। उसके बाद इस तरह का अजीबोगरीब फरमान जारी करें। इस पर जानकारी देते हुए वन विभाग के अफसर ने कहा कि उनके द्वारा जारी आदेश मूल रूप से वन्य पक्षियों का हो रहा है अवैध शिकार और तस्करी पर रोक लगाने को लेकर है। वीडियो में यह भी कहा गया है कि अगर सभी लोग इसी तरह से तस्करी करेंगे अवैध शिकार करेंगे और तोते को पकड़कर उसे रख लेंगे तो जैव विविधता कैसे होगी। कुल मिलाकर आने वाले समय में उनकी प्रजातियां पूर्ण रूप से विलुप्त हो जाएगी।

गौरतलब है कि तोता संरक्षित प्रजाति का पक्षी है, राज्य के ज्यादातर वनमंडलों में बड़े पैमाने पर जंगलों से तोता पकड़कर कारोबारियों के माध्यम से लोगों को बेचने का काम करते थे।इस बात को लेकर पक्षी प्रेमी चिंता व्यक्त करते हुए वन मंडल प्रमुख से लगातार कार्रवाई की मांग कर रहे थे। पक्षी प्रेमियों की मांग को देखते हुए वन मुख्यालय ने तोता की अवैध खरीदी बिक्री पर रोक लगाने के उद्देश्य से तोता की अवैध खरीद बिक्री हतोत्साहित करने तोता पालने से लेकर खरीदी बिक्री करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने संबंधित आदेश जारी किया था। हालांकि अब उसे स्थगित कर दिया गया है।जो कि लोगों के लिए अच्छी और राहत की खबर है।फिलहाल बिलासपुर में भी हजारों परिवारों ने तोता पाला हुआ है।पक्षियों में सबसे ज्यादा तोता पालने का ही चलन है। यह बेहद घरेलू है और परिवार के साथ कुछ ही दिनों में घुलमिल जाता है, इसलिए इसको पालना भी आसान है। आदेश जारी होने के बाद बिलासपुर सहित प्रदेशभर में इसे लेकर प्रतिक्रिया हुई थी। लोग पालतू तोते को लेकर संवेदनशील हुए और व्यापक प्रतिक्रिया के बाद फिलहाल आदेश स्थगित कर दिया गया है।

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