
बिलासपुर के विभिन्न विभागों से सेवानिवृत्त वरिष्ठ नागरिकों ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए एक अनोखी पहल की है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मेधावी बच्चों की पढ़ाई बीच में न छूटे, इसके लिए इन वरिष्ठ नागरिकों ने मिलकर एक नई शुरुआत की है। उनका उद्देश्य है कि सिर्फ पैसों की कमी की वजह से कोई भी होनहार बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।

इसी सोच के साथ इन वरिष्ठ नागरिकों ने उन गरीब बच्चों की पहचान की, जो पढ़ना चाहते हैं, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पा रहे। ऐसे बच्चों की स्कूल की फीस, किताबें, यूनिफॉर्म और अन्य शैक्षणिक जरूरतों का खर्च ये सभी मिलकर उठाने की कोशिश कर रहे हैं। इस पहल से न सिर्फ बच्चों को सहारा मिला है, बल्कि उनके अभिभावकों को भी शिक्षा के प्रति नई उम्मीद जगी है।

इन वरिष्ठ नागरिकों के समूह द्वारा पात्र छात्रों को हर वर्ष छात्रवृत्ति दी जाती है, ताकि वे बिना किसी आर्थिक दबाव के अपनी पढ़ाई जारी रख सकें। पिछली वर्ष कुल 22 बच्चों को छात्रवृत्ति प्रदान की गई थी। इस साल पिछली बार के मुकाबले और अधिक वरिष्ठ नागरिक इस मुहिम से जुड़े हैं, जिससे और ज्यादा बच्चों को लाभ पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।

सेवानिवृत्त अधिकारियों का कहना है कि समाज ने उन्हें सम्मान और पहचान दी है, अब बारी उनकी है कि वे समाज के भविष्य यानी बच्चों को संवारने में अपना योगदान दें। उनका मानना है कि अगर होनहार बच्चों को सही समय पर सहारा मिल जाए तो वे आगे चलकर न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे शहर और प्रदेश का नाम रोशन कर सकते हैं। इनके सहयोग से कई मेधावी बच्चे आज मजबूरी नहीं, बल्कि मजबूती के साथ अपनी पढ़ाई कर पा रहे हैं।


