इस शनिवार को देव स्नान पूर्णिमा उत्सव मनाया गया। बिलासपुर के रेलवे क्षेत्र स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, बहन सुभद्रा और सुदर्शन चक्र को 108 कलश के जल से स्नान कराया गया। इसके बाद आगामी 15 दिनो के लिए मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद हो गए।

हिंदुओं के चार प्रसिद्ध धाम में से एक जगन्नाथ धाम में विराजे भगवान जगन्नाथ की महिमा निराली है। विश्व के पालन करता होने के बाद भी वे मानवीय व्यवहार करते हैं ।वे वर्ष में एक बार अपने भक्तों को दर्शन देने उनके बीच चले आते हैं। वर्ष भर भगवान जगन्नाथ दर्पण स्नान करते हैं लेकिन देव स्नान पूर्णिमा पर वे किसी अन्य प्राणी की तरह सामान्य स्नान भी करते हैं। ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को देव स्नान पूर्णिमा के रूप में मनाया गया। श्री जगन्नाथ मंदिर में प्रातः भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा, भगवान बलभद्र की प्रतिमा को रत्न सिंहासन से बाहर निकाल कर स्नान वेदी पर विराजित किया गया। विधि विधान के साथ पूजा अर्चना करने के बाद पंचामृत से देव प्रतिमाओं को स्नान कराया गया, जिसके बाद नदी के जल और सुगंधित जल से सभी देव प्रतिमाओं को स्नान कराया गया। भगवान जगन्नाथ को 35 कलश, बलभद्र को 33, सुभद्रा को 22 और सुदर्शन चक्र को 18 कलश से स्नान कराया गया। इस स्नान के पश्चात सभी देवताओं को सादाभिषा पहनाया गया। दोपहर बाद उन्हें हाथी भीसा पहनाया गया। इस दिन भगवान को विशेष भोग अर्पित किया गया। संध्या सहाना मेला में भक्तों को दर्शन देने के बाद भगवान बीमार पड़ गए। असल में एक ही दिन इतने कलश से स्नान करने से उन्हें ज्वर आ गया, इसलिए वे अनसर भवन चले गए। अब अगले 15 दिनों तक वे अनसर भवन में ही रहेंगे और भक्तों को दर्शन नहीं देंगे।

अगले 15 दिनों तक भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा का काढ़ा और अन्य आयुर्वेदिक औषधियां से उपचार किया जाएगा। इस दौरान में अन्न ग्रहण नहीं करेंगे, इसलिए उन्हें फल कंदमूल आदि ही अर्पित किया जाएगा। 15 दिनों के उपचार के बाद इस वर्ष 6 जुलाई को वे स्वास्थ्य होंगे तो उनका नवजोबन दर्शन किया जाएगा और इसी दिन नेत्र उत्सव मनाया जाएगा।



नेत्र उत्सव के साथ ही भगवान जगन्नाथ स्वस्थ होने लगेंगे। उन पर उपचार का असर दिखने लगेगा लेकिन 15 दिन बुखार होने से भी कमजोर हो जाएंगे इसलिए अब मौसी मां के घर जाकर उनका आतिथ्य स्वीकार करेंगे। इस वर्ष 7 जुलाई को गुंडीचा यात्रा निकाली जाएगी। इस रथ यात्रा की तैयारी बिलासपुर में भी जोर-शोर से की जा रही है। मंदिर का रंग रोगन किया गया है। साथ यहां यहां रथ को भी सजाया संवारा जा रहा है। 7 जुलाई को विविध अनुष्ठान के बाद दोपहर को मंदिर से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की रथ यात्रा निकलेगी। इस वर्ष छेहरा पहरा की रस्म उपमुख्यमंत्री अरुण साव निभाएंगे। इस अवसर पर 10 से 15 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद की जा रही है। जगन्नाथ मंदिर से निकलकर यह रथ यात्रा रेलवे स्टेशन, तार बाहर, गांधी चौक, दयालबंद होते हुए उड़िया स्कूल में निर्मित मौसी मां के घर पहुंचेगी, जहां आगामी बहुड़ा यात्रा तक तीनों भगवान यही रहेंगे। बहुड़ा यात्रा से पहले प्रतिदिन विविध उड़िया सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी रथ यात्रा मैं सम्मिलित होकर भगवान के रथ का रास्ता खींचने लोग उमड़ेंगे। वैसे स्नान पूर्णिमा के दर्शन करने भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शनिवार को जगन्नाथ मंदिर पहुंचे।


पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में जो जो विधि विधान संपन्न किया जाता है बिलासपुर के रेलवे क्षेत्र में 1996 में निर्मित इस जगन्नाथ मंदिर में भी उस परंपरा को पूरे भक्ति भाव से निभाया जाता है। स्नान पूर्णिमा के बाद अब 15 दिनों तक भगवान बीमार पड़ गए हैं, जहां पुजारी दशमुली दवा से उनका उपचार करेंगे तो वही भगवान जगन्नाथ के भक्त भी उनके स्वस्थ होने की कामना करेंगे, जिन्हें गुंडीचा रथ यात्रा की बेसब्री से प्रतीक्षा है।


