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शिक्षक कमी: हाईकोर्ट में शिक्षण भर्ती पर रोक और आचारसंहिता लगने से नए शिक्षक की नियुक्ति में देरी, 1990 से व्याख्याता के पद पर नियुक्त अब सेवानिवृत्ति होने की स्थिति में।

शिक्षण सत्र समाप्त हो चुका है, वही नया सत्र भी शुरू हो गया है, उसके बावजूद भी स्कूलों में प्राचार्य की कमी बनी हुई है। जिससे स्कूलो का काम प्रभावित हो रहा है, बड़ी संख्या में प्राचार्य की सेवानिवृत्ति हो रही है और वही नई नियुक्ति नहीं होने से कई स्कूल प्राचार्य विहीन है। प्राचार्य की भर्ती को लेकर मामला हाई कोर्ट में लंबित था, निर्णय आने के बाद आचार संहिता लागू हो गया है। अब बताया जा रहा है कि चुनाव के बाद ही स्कूलों में स्थाई प्राचार्य की नियुक्ति की जाएगी।

शिक्षकों ने बताया कि 1990 से व्याख्याता के पद पर ही नियुक्त है और आज तक एक भी पदोन्नति नहीं मिली है, जिससे उनमें असंतोष की भावना जाग रही है। शिक्षकों का कहना है कि स्थाई रूप से प्राचार्य की भर्ती होनी चाहिए और सबको पदोन्नति का अवसर मिलना चाहिए। इससे व्यवस्था बनी रहती है और स्कूल का कामकाज सुचारू होता है। अब चुनाव के बाद संभावना जताई जा रही है कि प्राचार्य के खाली पद भरे जाएंगे।

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