
एकादशी की रात को गौरा-गौरी बैठाने की परंपरा छत्तीसगढ़ में सदियों से चली आ रही है। दीपावली और एकादशी के अवसर पर गौरा-गौरी एवं भगवान शिव की विधिवत स्थापना कर पूजा-अर्चना की जाती है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए रविवार को बिलासपुर के सिरगिट्टी क्षेत्र में भी श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और भक्ति के साथ गौरा-गौरी पूजा का आयोजन किया।कार्यक्रम की शुरुआत माटी से गौरा-गौरी प्रतिमाओं के निर्माण और स्थापना से हुई। इसके बाद मंत्रोच्चारण और वैदिक विधि के साथ पूजा-अनुष्ठान संपन्न किए गए। महिलाओं ने पारंपरिक गीतों के साथ पूजा में हिस्सा लिया। क्षेत्रवासियों ने धूप-दीप, पुष्प, नवैध और पारंपरिक सामग्रियों से आराधना कर सुख-समृद्धि एवं परिवार के कल्याण की कामना की।पूजन के बाद प्रतिमाओं के विसर्जन के पूर्व भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। शोभायात्रा में ढोल-नगाड़ों, पारंपरिक वाद्य-यंत्रों और जयकारों के बीच पूरी धार्मिक आस्था के साथ उत्साह देखा गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों की भी उपस्थिति रही। बिल्हा के पूर्व विधायक सियाराम कौशिक, ब्लॉक मंडल अध्यक्ष त्रिपुरा लक्ष्मी नाथ साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने पूजा में हिस्सा लेकर आशीर्वाद प्राप्त किया और क्षेत्र की उन्नति की कामना की।स्थानीय निवासियों ने बताया कि पिछले 20 वर्षों से इस क्षेत्र में लगातार इसी तरह से गौरा-गौरी पूजन एवं शोभायात्रा का आयोजन होता आ रहा है, जो सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रमुख अवसर बन चुका है।


