
श्रीमद् भगवत गीता का सार खुशहाल जीवन का आधार सरकण्डा शिव वरदानी भवन के प्रांगण में आयोजित कथा के अंतिम सातवें दिन का शुभारंभ ओम् ध्वनि और दीप प्रज्वलन से हुआ।मंच पर विराजमान मुख्य अतिथियों एवं आध्यात्मिक प्रवक्ता भारती दीदी जी ने आज के दिव्य विषय “राजयोग से अष्ट शक्तियों की प्राप्ति” पर अपने गहन विचार साझा किए।दीदी जी ने कहा कि राजयोग वह दिव्य विद्या है जिससे आत्मा अपने स्वरूप को पहचानकर मन, बुद्धि और संस्कारों पर राज करने लगती है।

जब आत्मा परमपिता परमात्मा से योग लगाती है तो उसमें अष्ट शक्तियाँ जागृत हो जाती हैं —सहन करने की शक्ति, सामना करने की शक्ति, निर्णय लेने की शक्ति, परखने की शक्ति , सहयोग करने की शक्ति, विवेक शक्ति, अनुकरण शक्ति और समर्पण शक्ति।इन्हीं शक्तियों से जीवन में स्थिरता, संयम और सच्ची खुशी प्राप्त होती है।कार्यक्रम के दौरान विकारों — काम, क्रोध, लोभ, मोह,अहंकार,इर्ष्या-द्वेष, घृणा-नफरत,देकर हवन किया गया।सभी उपस्थित आत्माओं ने अपने मन के विकारों को कागज पर लिखकर दिया जिसे अग्नि हवन में स्वाहा कर पवित्र जीवन जीने का संकल्प लिया।

हवन स्थल पर ग्यारह युगल जोड़े बैठे थे । वातावरण पूर्णतः शांति, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा से भरा हुआ ।दीदी जी ने बताया कि “जैसा अन्न, वैसा मन” — इसलिए सात्विक भोजन केवल शरीर का ही नहीं, आत्मा का भी पोषण करता है।सच्ची पूजा वही है जहाँ मन, वाणी और कर्म सब शुद्ध हों। कथावाचक ब्र.कु. भारती दीदी ने मंच पर उपस्थित पचास ब्रह्माकुमारी , कुमार सहित हजारों श्रोतागण भक्त श्रद्धालुओं को अपने अवगुणों को छोड़ने और सद्गुणों को धारण करने तथा स्वयं को परिवर्तन कर विश्व परिवर्तन की दिशा में आगे कदम बढ़ाने का संकल्प कराया ।

संध्या आरती में मुख्य अतिथि के रूप में आसमा सिटी होम से रोटरी क्लब ऑफ क्रॉउन की अध्यक्ष नीरू विस्ट , फॉरेस्ट विभाग की रेंजर शांता बहन तथा तालापारा क्षेत्रीय संचालिका आदरणीया रमा दीदी , सरकण्डा सेंटर प्रभारी मधु दीदी साथ में माऊंट आबू राजस्थान के शांतिवन गॉडली वुड स्टूडियों की कंचन बहन शामिल रही । मुख्य अतिथियों ने अपने उद्बोधन में कहा कि इस प्रकार कार्यक्रम समाज में आध्यात्मिक जागृति फैलाते हैं और मनुष्यों को सच्चे जीवन मूल्यों की याद दिलाते हैं।


