नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की। कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर हर तरह का माहौल कृष्ण भक्तिमय से रमा हुआ है। जब जब असुरों के अत्याचार बढ़े हैं, तब तब भगवान ने पृथ्वी पर अवतार लेकर भक्तों की रक्षा कर सत्य और धर्म की स्थापना की है। भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की मध्यरात्रि को कंस का विनाश करने के लिए मथुरा में भगवान कृष्ण ने अवतार लिया था। इसलिए इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी या जन्माष्टमी का पर्व मनाते हैं। इस बार श्रीकृष्ण जन्म पर वैसा ही संयोग बन रहा जैसा द्वापर युग में उनके जन्म के समय था। इस बार ग्रह, नक्षत्र और अष्टमी तिथि एक साथ 26 अगस्त की रात में मिल रहे हैं, जिसे बहुत शुभ संयोग माना जा रहा है।


लिहाजा सोमवार को कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर सुबह से ही सभी कृष्ण मंदिरों में भक्त भगवान कृष्ण की आराधना करने मंदिरों में पहुंचते रहे, इस दौरान कृष्ण मंदिरों में विशेष साथ सजा के साथ भगवान कृष्ण को पालने में बैठाया गया, जहां आकर्षक विद्युत सज्जा के साथ भगवान को नए वस्त्र धारण भी कराया गया। देर रात भगवान कृष्ण का जन्म हुआ। जहां भक्तों ने भगवान श्री कृष्ण के दर्शन प्राप्त कर उनका आशीर्वाद ग्रहण किया, इस मौके पर मंदिरों में विशेष पूजा अनुष्ठान के साथ भोग भंडारा भी वितरित किया गया।





