सोलापुरी माता के दर्शन करने पहले ही दिन उमड़े श्रद्धालु, लकी ड्रॉ निकालकर महिलाओं और बच्चों को दिया गया आकर्षक उपहार।

बारह खोली चौक स्टेशन रोड बिलासपुर में 24 वे वर्ष श्री श्री सोलापुरी माता पूजा का आयोजन किया जा रहा है। श्री श्री सोलापुरी माता पूजा सेवा समिति का यह आयोजन इस वर्ष नए स्थान पर हो रहा है, जहां विशाल और भव्य पंडाल तैयार किया गया है। इस बार केवल पंडाल को ही आकर्षक एवं भव्य नहीं बनाया गया है बल्कि श्रद्धालुओं के लिए भी कई विशेष व्यवस्था की गई है। तेज गर्मी को ध्यान में रखकर यहां बड़ी संख्या में पंखे और कूलर की भी व्यवस्था आयोजन समिति द्वारा की गई है।

सोलापुरी माता पूजा के पहले दिन यहां खड़कपुर से आए पुजारी पार्थ सारथी और उनके सहयोगियों ने पारंपरिक रूप से गीली हल्दी से माँ सोलापुरी का विग्रह तैयार किया। आयोजन समिति के अध्यक्ष वी राम राव और सचिव एस सांई भास्कर ने बताया कि इस आयोजन की विशेषता यही है कि पुजारी द्वारा प्रतिदिन गीली हल्दी से ही देवी के अलग-अलग स्वरूपों का निर्माण किया जाता है। दोपहर बाद इसकी तैयारी आरंभ होती है और रात करीब 9:00 बजे देवी की विधि विधान और मंत्र उपचार के साथ पूजा अर्चना एवं आरती की जाती है।

कौन है माँ सोलापुरी

शक्ति की उपासना देश में अलग-अलग रूपों में की जाती है। दक्षिण भारत में मां जगदंबे को सोलापुरी स्वरूप में पूजा जाता है। मान्यता है की मां की सात बहने हैं जो परम प्रतापी है। मां सोलापुरी का विश्व प्रसिद्ध मंदिर खड़कपुर के रेलवे क्षेत्र में है और यहीं से सोलापुरी माता पूजा उत्सव की भी शुरुआत हुई। इस पूरे आयोजन की जड़े पश्चिम बंगाल के खड़कपुर से ही जुड़ी हुई है, जहां से चलकर बिलासपुर में इसने महोत्सव का रूप ले लिया । सोलापुरी माता देवी शीतला का ही एक स्वरूप है, जो ग्रीष्म काल में होने वाली लू, ज्वर, छोटी बड़ी चेचक जैसी बीमारियों से रक्षा करती है तो वही देवी की आराधना उपासना से क्षेत्र में शीतलता आती है और तेज गर्मी से राहत मिलती है। शनिवार को पहले दिन श्रद्धालुओं ने मां सोलापुरी के इसी विराट स्वरूप के दर्शन किये। दक्षिण भारतीय शैली में पट्टू साड़ी , मोगरे के हार और आभूषणों से मां का सिंगार किया गया। देवी को विशेष मुकुट पहनाया गया। इस दिव्य रूप के दर्शन कर श्रद्धालु झूम उठे।

बाल पुजारी कर रहे सेवा

अध्यक्ष वी रामाराव और सचिव एस सांई भास्कर ने जानकारी देते हुए बताया कि श्री सोलापुरी माता पूजा की कई विशेषताएं हैं। पुजारी के साथ पांच बाल पुजारी पूरे 10 दिन उपवास रखकर देवी की पूजा अर्चना और अनुष्ठानों में पूरा सहयोग करते हैं। केवल धोती पहने और शरीर पर हल्दी का लेप लगाएं यह बाल पुजारी इन दिनों में अपने घर नहीं जाते। पूरा समय देवी की सेवा में समर्पित करते हैं। केवल फल आदि का ही सेवन करते हैं। इस वर्ष बाल पुजारी के रूप में अबीर बोस, सांई किरण, भूषण, मोक्ष और अक्षित को देवी की सेवा का यह अवसर मिला है जिसे पाना परम सौभाग्य कारी माना जाता है। इसी कारण हर वर्ष इसके लिए भी कड़ी प्रतिस्पर्धा देखी जाती है।

पहले दिन देवी को हलवा का लगा भोग

सोलापुरी माता पूजा में प्रतिदिन देवी के अलग-अलग रूप की पूजा अर्चना की जाती है। इस दौरान खड़कपुर से आए विशेष रसोईये भास्कार उर्फ ब्रूस ली द्वारा प्रतिदिन अलग-अलग प्रकार का भोग तैयार किया जाता है, जिनमे से अधिकांश दक्षिण भारतीय होते हैं। यहां पहले दिन देवी को सूजी के हलवे का भोग विपिन प्रसाद पटनायक के सौजन्य से चढ़ाया गया। पूजा आरती के पश्चात यही प्रसाद स्वरूप में सब भक्तों के बीच वितरित किया गया।

लकी ड्रॉ निकाल किया गया उपहार प्रदान

हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी आयोजन समिति द्वारा महिलाओं और बच्चों के लिए लकी ड्रा निकाली गई। इसके लिए पंडाल में आए महिलाओं और बच्चों को निशुल्क कूपन वितरित किया गया। शनिवार के विशेष अतिथि श्री बिल्डर के संचालक कमलेश कश्यप द्वारा लाटरी पद्धति से लकी ड्रा निकाला गया, जिनके विजेताओं को माता को समर्पित 3 साड़ी, देवी के चित्र वाले चांदी के तीन फोटो फ्रेम और देवी के चित्र वाले सोने के दो फोटो फ्रेम प्रदान किए गए। तो वही विजेता बच्चों को स्टेशनरी सामग्री वितरित की गई।

इस आयोजन में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं लेकिन सुरक्षा के लिए किसी भी सिक्योरिटी की आवश्यकता नहीं पड़ती क्योंकि समिति के ही सफेद गणवेश धारी वालंटियर युवक और युवतियां पूरे अनुशासन के साथ यह व्यवस्था संभालते हैं, जिनका सेवा भाव देखते ही बनता है।

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