शुक्रवार से लोकसभा चुनाव की नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गयी है।नामांकन के पहले ही दिन कलेक्ट्रेट में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया, जिससे ट्रेजरी और नामांकन दाखिल करने वाले अधिकारी भी परेशान हो गए। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट कहा दिया कि वे लोग सिक्का जमा नहीं कर पाएंगे।



12 अप्रैल, शुक्रवार को नामांकन दाखिल करने अन्यों के साथ जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय में पुजारी और एलआईसी एजेंट का काम करने वाले बिलासपुर शहर के ही अनिमेष मिश्रा पहुंचे। आश्चर्य चकित करने वाली बात ये थी कि ये अपने साथ नामांकन शुल्क के रूप में 25 हजार रुपये का एक, दो, पांच और दस रुपये के सिक्के अलग अलग थैले और बोरियों में लेकर पहुंचे। 25 हजार रुपये के रूप में भारी भरकम सिक्का देखकर नामांकन दाखिल करने बैठे अधिकारियों के बीच हड़कम्प मच गया। वहीं लोकसभा के लिए दावेदारी करने अपना नामांकन दाखिल करने पहुंचे अनिमेष भी पूरे कलेक्ट्रेट परिसर में चर्चा का विषय बन गए। एलआईबी, मीडिया से लेकर हर एक व्यक्ति इनके पास भागा-भागा पहुंचा और चुनाव लड़ने को लेकर उनकी मंशा जाननी चाही। अनिमेष ने कहा कि 20 वर्षों से बिलासपुर में बीजेपी का कब्जा है। जिस मंशा से उन्होंने बीजेपी को जिताया है। आज तक उनकी मंशा अनुरूप बीजेपी ने कार्य नहीं किया। इसलिए वे बदलाव के उद्देश्य से नामांकन दाखिल कर रहे हैं। उन्होंने 5 वर्षों तक एक एक सिक्का जमा करके 25 हजार नामांकन शुल्क जुटाया है। उनकी पत्नी ने कहा कि वे हर परिस्थितियों में अपने पति के साथ है। इसलिए उनका कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग करेंगी।



बहरहाल लोकसभा के लिए दावेदारी करने वाले अनिमेष ने आपत्ति भी दर्ज कराई की पूर्व विधानसभा में इसी तरह निर्वाचन अधिकारियों ने भारी मात्रा में सिक्कों के साथ एक प्रत्याशी का नामांक दाखिल किया था। लेकिन इस बार वे खुद सिक्का लेकर आएं है तो अधिकारी मना कर रहे है। जबकि केंद्र सरकार के लिए चुनाव है और सिक्का भी भारत सरकार का है तो अधिकारी कैसे मना कर सकते है। इससे मायूस होकर अनिमेष ने इसकी शिकायत निर्वाचन आयोग से करने की भी बात कही।





