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हेरा पंचमी पर रुष्ट देवी लक्ष्मी के निर्देश पर उनके सेवकों ने भगवान जगन्नाथ के रथ को पहुंचाया नुकसान।

इन दिनों भगवान जगन्नाथ अपने भाई और बहन के साथ मौसी मां गुंडिचा के घर उनका आतिथ्य स्वीकार कर रहे हैं और यह बात उनकी पत्नी देवी लक्ष्मी को स्वीकार नहीं । इसी प्रसंग को हेरा पंचमी पर साकार करते हुए मनाया गया।

वैसे तो भगवान जगन्नाथ पूरे जगत के स्वामी है लेकिन भूलोक में रहने के दौरान वे भी पूरी तरह से मानवीय लीलाओं को प्रदर्शित करते हैं ।स्नान पूर्णिमा पर अत्यधिक जल से स्नान करने पर वे बीमार पड़ गए। स्वस्थ होने पर अपने भाई-बहन के साथ मौसी मां गुंडीचा के घर पहुंच गए। इन दिनों वे गुंडिचा मंदिर में मौसी मां का आतिथ्य स्वीकार कर रहे हैं, जहां उन्हें परंपरिया छाना पुरा का भोग प्रतिदिन लगाया जा रहा है। अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मौसी मां के घर आनंद कर रहे भगवान जगन्नाथ की पत्नी देवी लक्ष्मी इस बात से रुष्ट है कि उनके पति उन्हें छोड़कर भाई बहन के साथ यात्रा पर निकल गए। अपनी यही नाराजगी देवी लक्ष्मी ने हेरा पंचमी पर प्रकट की। इस दिन श्री मंदिर से देवी लक्ष्मी को सुवर्ण महालक्ष्मी के रूप में गुंडीचा मंदिर ले जाया गया जहां उनकी भेंट भगवान जगन्नाथ से कराई गई। देवी लक्ष्मी को छोड़कर अकेले गुंडिचा मंदिर जाने से नाराज देवी लक्ष्मी ने अपने सेवको को भेज कर उनके रथ भांग का आदेश दिया। उनके आदेश पर उनके बेताल और सेवको ने भगवान जगन्नाथ के रथ नदी घोष को नुकसान पहुंचाया और फिर रात के अंधेरे में चुपचाप लौट आए।

बिलासपुर रेलवे क्षेत्र स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में भी हेरा पंचमी पर रथ भंग की परंपरा को पूरा किया गया। जगन्नाथ पुरी में मनाए जाने वाले प्रमुख अनुष्ठानों में से एक इस अनुष्ठान के अवसर पर बिलासपुर में भी बड़ी संख्या में जगन्नाथ के भक्त सम्मिलित हुए।

गुंडिचा मंदिर में भगवान जगन्नाथ के रहने के अवसर पर प्रति संध्या उड़िया स्कूल में विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, साथ ही अलग-अलग प्रतिभाओं का सम्मान समारोह भी आयोजित हो रहा है। गुरुवार को भी यहां भजन संध्या का आयोजन किया गया।

आगामी 15 जुलाई को बहुड़ा यात्रा के साथ भगवान जगन्नाथ एक बार फिर से श्री मंदिर लौट आएंगे, जहां वे रूठी हुई पत्नी को मनाने के लिए अपने साथ लक्ष्मी को प्रिय रसगुल्ला लेकर आएंगे और वही खिलाकर उन्हें मनाएंगे।

बिलासपुर में आयोजित श्री जगन्नाथ रथ यात्रा में इस वर्ष हजारों की संख्या में भक्त उमड़े थे। इन दिनों जगन्नाथ मंदिर और गुंडिचा मंदिर की आकर्षक सजावट की गई है। यहां मेंले जैसा माहौल है। अब सभी को बहुड़ा यात्रा की प्रतीक्षा है। 15 अप्रैल को एक बार फिर दोपहर 1:00 बजे विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करने के बाद महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को रथ पर विराजित किया जाएगा और फिर उनकी वापसी यात्रा आरंभ होगी। दोपहर 2:00 बजे यह यात्रा तोरवा थाना, जगमल चौक, गांधी चौक, तारबाहर, स्टेशन रोड होते हुए वापस जगन्नाथ मंदिर पहुंचेगी। लक्ष्मी को मनाने के बाद भगवान जगन्नाथ एक बार फिर से श्री मंदिर में स्थापित होंगे और फिर वहीं से सभी भक्तों को दर्शन देंगे।

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