चांटीडीह मेलापारा में अवैध कब्जा कर रह रहे 700 बेजाकब्जाओं को तो नगर निगम ने खदेड़ दिया, लेकिन 300 मकानों पर मेहरबान है। जबकि निगम अफसरों का ही दावा है कि सभी एक हजार लोगों को पीएम आवास योजना के तहत फ्लैट उपलब्ध कराए जा चुके हैं। ऐसे में निगम की अधूरी कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं। इस विषय पर निगम का कहना है कि जिन मकानों का डीपीआर नहीं हुआ है उन्हें छोड़ दिया गया है उन्हें मकान उपलब्ध कराने के बाद तोड़ा जाएगा।

चांटीडीह मेलापारा में पिछले दिनों बेजा कब्जा वाले मकान की तोड़फोड़ की गई है, जिसमें से 300 मकान को छोड़ दिया गया है इसे लेकर जिनके मकान तोड़े गए हैं उन्होंने निगम पर भेदभाव का आरोप लगाया है, इसके सवाल के जवाब पर निगम कमिश्नर ने डीपीआर का हवाला देते हुए निगम को पाक साफ बताया है। नगर निगम आयुक्त की माने तो फिलहाल जितने मकान का डीपीआर तैयार हुआ था, उन सभी को मकान आवंटित कर दिया गया है जबकि जो बचे हुए मकान है, उनका डीपीआर तैयार हो रहा है और उन्हें भी जल्द मकान आवंटित कर दिया जाएगा इसके बाद उक्त क्षेत्र के समस्त मकान को हटाने की कार्रवाई पूर्ण की जाएगी।


गौरतलब है निगम के अतिक्रमण निवारण अमले ने चांटीडीह मेलापारा में तोड़फोड़ की कार्रवाई अचानक बंद कर दी। चांटीडीह मेलापारा के 700 मकान तोड़े गए। जो 300 मकान छोड़ दिए गए हैं, वे ईरानी मोहल्ले के हैं। यहां के लोगों को भी आवास का आवंटन किया जा चुका है। इसके बाद अचानक कार्रवाई क्यों बंद की गई, इस पर सवाल उठने लगे और लोगों ने पक्षपात का आरोप लगाया।







