सावन का पावन महीना शुरू हो गया है। सावन के महीने में शिव भक्त शिव मंदिर जाकर पूजा पाठ एवं रुद्राभिषेक कर रहे हैं। बिलासपुर में एक ऐसा ही ऐतिहासिक मंदिर मध्य नगरी चौक के पास स्थित है। अष्टमुखी शिव मंदिर लगभग 115 वर्ष पुराना है। अष्टमुखी शिव मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है। बल्कि इसका ऐतिहासिक महत्व भी है। सावन और महाशिवरात्रि में यहां पर भक्तों की कतार लगी होती है। मंदिर के पुजारी ने बताया कि अष्टमुखी शिव का यह मंदिर स्वयंभू मंदिर है।



करीब 115 वर्ष पहले मल्हार में अष्टमुखी स्वयंभू महादेव प्रकट हुए। जिनको सन 1985 में यहां लाकर स्थापित किया गया। प्रतिमा की स्थापना के बाद से ही भक्तों को एक शक्ति की अनुभूति हुई। अष्टमुखी शिव मंदिर को पंचायती शिव मंदिर भी कहा जाता है। क्योंकि यहां भगवान सपरिवार विराजमान है। शुरुआत में मंदिर बहुत ही छोटा सा था। किंतु समय के साथ-साथ मंदिर समिति सदस्यों ने मंदिर को एक बड़ा रूप दिया। अष्टमुखी मंदिर में दूर-दूर से लोग दर्शन के लिए आते हैं। आपको बता दे कि सावन के दिनो मे विशेष पूजा अर्चना के लिए यहां एक साल पहले से ही बुकिंग शुरू हो जाती है। मंदिर स्थापना के बाद से ही मंदिर में दर्शन करने आने वाले सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती है। यही कारण है कि दिन प्रतिदिन भक्तों की आस्था मंदिर के प्रति बढ़ती ही जा रही है। सावन आते-आते लोग विशेष पूजा अर्चना की बुकिंग कर लेते हैं।




