मुंगेली को अलग जिला बने एक लंबा अरसा हो गया लेकिन उपभोक्ताओं की समस्या और शिकायत के निराकरण के लिए यहां आज तक व्यवस्थित कार्यालय नहीं बन पाया। जुगाड़ में संचालित कार्यालय से न केवल कामकाज प्रभावित हो रहा है बल्कि उपभोक्ताओं को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

उपभोक्ताओं की समस्या और शिकायत के निवारण के लिए उपभोक्ता फोरम का कार्यालय मुंगेली जिले में जुगाड़ में संचालित किया जा रहा है पूरे कामकाज, कार्यालय और स्टाफ सब अस्थायी तौर पर किये गए है। भले ही मुंगेली जिले को बने 12 वर्ष बीत चुके है पर आज तक इस महत्वपूर्ण विभाग के कार्यालय के लिए कार्यालय,भवन आबंटित नही किये गए है। प्रशासनिक लापरवाही कहे या उदासीनता यही वजह है कि माह में एक दिन ही उपभोक्ताओं के प्रकरणों की सुनवाई अतिरिक्त कलेक्टर के न्यायालय में की जा रही है। जिससे पक्षकारों और स्टाफ को समस्याओं से जूझना पड़ता है।

जिले में उपभोक्ता फोरम के कार्यालय 2015 से संचालित हो रहे है वो भी अस्थायी तौर पर 15 लोगो की सेटअप वाले कार्यालय में 5 कर्मचारी की नियुक्ति हुई है वो भी सभी अन्य जिले के कार्यालयों में संलग्न है कार्य अन्य जगह कर रहे पर वेतन मुंगेली कार्यालय से निकल रहे है। यहाँ तक की अध्यक्ष और सदस्य सभी प्रभार में है। आधुनिकता के इस युग मे फ्रॉड के नए नए हथकंडे अपनाए जा रहे है। ऑनलाइन डिजिटल शॉपिंग जैसे वेबसाइट में फ्रॉड के शिकार हो रहे भोले भाले उपभोक्ता अपने अधिकारों को न जानने की वजह से आर्थिक हानि उठा रहे है। जिले के सैकड़ो उपभोगता जानकारी के आभाव में उपभोक्ता फोरम का लाभ नही ले पा रहें है. उपभोक्ता फोरम के बारे मे प्रचार प्रसार का जिम्मा खाद्य विभाग का है पर उपभोक्ता फोरम की ऑफिस नही होने के चलते लोगों को जानकारी नही है और न ही विज्ञापन या फ्लेक्स बैनर के साथ कभी प्रचार किया गया है।

भवन कार्यालय कमरे के अभाव में जो सुनवाई प्रतिदिन होना था वह माह में सिर्फ एक बार हो रहा है जिसका निराकारण महीने दो महीने मे हो जाता उनको कई वर्ष लग जाते है, जानकारी के आभाव में उपभोक्ता फोरम में कंप्लेन करने की संख्या कम हो रही जिससे प्रकरणों की संख्या में कमी आई है. ऐसे में समस्याओं का निराकरण न होने से फ्रॉड धोखाधड़ी बेख़ौफ़ चल रहे है, इस मामले में अतिरिक्त प्रभारी सदस्य ने बताया कि नियमित रूप से कार्यालय संचालित होने से आमजनों को सीधा लाभ मिलेगा। वही अतिरिक्त कलेक्टर निष्ठा पांडेय ने जल्द ही व्यवस्था करने की बात कही है।

उपभोक्ता अधिकारों की लड़ाई की शुरुआत ही शायद उपभोक्ताओं के अधिकारों के लिए व्यवस्थित कार्यालय की मांग के साथ करनी होगी। ऐसे में जनप्रतिनिधियों की भूमिकाओं पर भी सवाल उठने लगे हैं।




