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घर से चल रहा अवैध राशन कारोबार, चूहों ने बोरियों को कुतरा,जनता की सेहत और शासन दोनों पर खतरा,,खाद्य विभाग की चुप्पी पर उठ रहे गंभीर सवाल, आखिर किसका मिला है संरक्षण?…

बिलासपुर :- तालापारा और मरिमाई के रहवासी सावधान हो जाइए! कब्रिस्तान रोड स्थित अन्नपूर्णा प्राथमिक सहकारी उपभोक्ता भंडार का संचालन नियम विरुद्ध तरीके से किया जा रहा है। संचालक गोबिंद नायडू ने अपनी अधिकृत दुकान को लंबे समय से बंद कर रखा है और खुलेआम अपने घर से ही राशन वितरण का अवैध खेल खेल रहे हैं।

शासन-प्रशासन की गाइडलाइन के मुताबिक उचित मूल्य की दुकानें केवल अधिकृत स्थान से ही संचालित हो सकती हैं, लेकिन गोबिंद नायडू ने पूरी तरह नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए अपने घर को ही दुकान बना दिया है। तालापारा और मरिमाई क्षेत्र के हितग्राहियों की जिंदगी और शासन का अनाज दोनों ही खतरे में हैं। कब्रिस्तान रोड स्थित अन्नपूर्णा प्राथमिक सहकारी उपभोक्ता भंडार के संचालक गोबिंद नायडू ने नियम विरुद्ध अपनी अधिकृत दुकान को बंद कर घर के अंदर बनावटी गोदाम बना रखा है।लेकिन इस घरनुमा गोदाम की असलियत चौंकाने वाली है। दर्जनों सरकारी चावल की बोरियां खुलेआम पड़ी हैं, जिन्हें चूहों ने कुतरकर नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है। चूहों के मल-मूत्र और गंदगी में रखे इस चावल का वितरण गरीब हितग्राहियों तक हो रहा है। इससे लोगों की सेहत को भारी खतरा है और शासन-प्रशासन को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।

जनता सवाल पूछ रही है कि आखिर इस लापरवाही का जिम्मेदार कौन है? खाद्य विभाग को सब जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या यह विभाग की मिलीभगत नहीं है कि संचालक खुलेआम नियम तोड़ते हुए घर से दुकान चला रहा है और शासन का अनाज चूहों के हवाले कर दिया गया है?
इस पूरे मामले ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी अनाज अगर चूहों और गंदगी में सड़ रहा है तो इसकी जवाबदेही तय करनी होगी। आखिर किसकी शह पर गोबिंद नायडू लंबे समय से दुकान बंद कर घर से अवैध कारोबार चला रहा है?

कुल मिलाकर यह पूरा मामला शासन की योजनाओं और जनता के भरोसे दोनों के साथ विश्वासघात है। जनता सवाल कर रही है कि आखिर कब तक खाद्य विभाग ऐसे दुकानदारों की मनमानी पर पर्दा डालता रहेगा? अब यह देखना होगा कि प्रशासन कब तक आंख मूंदे बैठेगा और कब इस पर सख्त कार्रवाई होगी। फिलहाल तालापारा और मरिमाई के हितग्राही अपने स्वास्थ्य और हक दोनों के साथ धोखा खा रहे हैं।फिलहाल तालापारा और मरिमाई के लोग इस गंदे और संक्रमित चावल को खाने को मजबूर हैं। शासन-प्रशासन और खाद्य विभाग की खामोशी ने साफ कर दिया है कि यह खेल सिर्फ एक दुकानदार का नहीं बल्कि संरक्षण की चादर में पनपता अवैध कारोबार है। जनता अब मांग कर रही है कि दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो और हितग्राहियों के स्वास्थ्य और हक की रक्षा की जाए।

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