ग्राम सोंठी में मां मन्नादाई मंदिर से निकली भव्य कलश यात्राहजारों श्रद्धालु हुए शामिल, आस्था और भक्ति का उमड़ा सैलाब

बिलासपुर। सीपत तहसील के सुदूर वनांचल ग्राम सोंठी में स्थित बगलामुखी मां मन्नादाई मंदिर से शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन भव्य कलश यात्रा निकाली गई। गाजे-बाजे और जयकारों के बीच निकली इस शोभायात्रा में लगभग 3000 से 4000 श्रद्धालु शामिल हुए।मां मन्नादाई मंदिर की स्थापना करीब 400 वर्ष पूर्व हुई थी और तब से यहां माता बगलामुखी आदिकाल से विराजमान हैं। शारदीय, बसंती और गुप्त नवरात्रि का पर्व यहां धूमधाम से मनाया जाता है।

विशेष रूप से नवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालुओं का आस्था और भक्ति का सैलाब उमड़ पड़ता है।शारदीय नवरात्रि के पहले दिन निकली कलश यात्रा में ग्राम के सरपंच नीमा वस्त्रकार और जनपद प्रतिनिधि लक्ष्मी पोर्ते अपने परिवार सहित शामिल हुए। दोनों ने पदयात्रा कर माता की शोभायात्रा में सहभागिता निभाई।मां मन्नादाई सेवा समिति के अध्यक्ष रामेश्वर जायसवाल ने बताया कि माता अपने भक्तों की मनोकामनाओं को तुरंत पूर्ण करती हैं।

ग्रामवासियों के श्रमदान और सहयोग से भव्य मंदिर और ज्योति कलश कक्षा का निर्माण कराया गया है। साथ ही मंदिर परिसर में माता की बगिया का भी निर्माण किया जा रहा है।केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने हाल ही में प्रवास के दौरान मंदिर की गरिमा को नमन करते हुए संस्कृत मंच निर्माण हेतु ₹50,000 स्वेच्छानुदान दिया। नवरात्रि के तुरंत बाद इस सांस्कृतिक मंच का निर्माण शुरू होगा।

भव्य कलश यात्रा में सोंठी के साथ-साथ आसपास के ग्राम खमरिया, बिटकुला, मड़ाई, साजापाली, लूथरा, सीपत और गतौरा से भी हजारों श्रद्धालु पहुंचे और पुण्य लाभ प्राप्त किया। ग्रामीणों का उत्साह और आस्था देखते ही बनती थी।इस वर्ष नवरात्रि पर्व के आयोजन में मां मन्नादाई सेवा समिति की पूरी टीम सक्रिय रही।

समिति में उपाध्यक्ष श्री भीम प्रताप सिंह ठाकुर, कोषाध्यक्ष श्री भूपेंद्र तिवारी, सचिव श्री राजकिशोर ठाकुर सहित हीरालाल पटेल, महेंद्र चंद्रिकापुरे, फागुराम पटेल, महेंद्र जायसवाल, भूषण पटेल, श्याम सुंदर पटेल, सुनऊ राम पटेल और प्रीतम सिंह ठाकुर का विशेष योगदान रहा।मंदिर परिसर में इस बार कुल 627 तेल ज्योति कलश और 14 घी ज्योति कलश प्रज्वलित किए गए हैं। इनकी देखरेख पंडित प्रमोद तिवारी, कार्तिक राम बैगा, संतोष बैगा, धनीराम, कोमल बैगा और किशन बैगा कर रहे हैं। ज्योतियों की दिव्यता और भक्तों की श्रद्धा से पूरा वातावरण आलौकिक हो उठा।

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