
जांजगीर जिले के नवागढ़ विकासखंड के ग्राम पंचायत केसला से एक बेहद संवेदनशील खबर सामने आई है। आज़ादी के इतने सालों बाद भी यहाँ बुनियादी सुविधाओं की कमी साफ नज़र आ रही है। गाँव में अब तक एक भी मुक्तिधाम का निर्माण नहीं हो पाया है, जिसके चलते ग्रामीणों को मजबूरन खुले मैदान में अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है।ग्रामीणों का कहना है कि खुले में अंतिम संस्कार से न केवल धार्मिक परंपराओं और भावनाओं को ठेस पहुँचती है, बल्कि यह स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए भी बड़ा खतरा बन चुका है। खुले मैदान में उठने वाला धुआँ आसपास के लोगों को परेशान करता है और बच्चों व बुजुर्गों पर इसका बुरा असर पड़ता है।

हैरानी की बात यह है कि ग्रामीणों ने कई बार इस गंभीर समस्या की शिकायत स्थानिक जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से की है। बावजूद इसके अब तक किसी भी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। गाँव के लोगों का कहना है कि उन्हें हर बार केवल आश्वासन ही मिलता है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कोई व्यवस्था नहीं की जाती।गाँव के बुजुर्गों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि जल्द से जल्द एक सुव्यवस्थित मुक्तिधाम का निर्माण कराया जाए, ताकि ग्रामीण सम्मानपूर्वक अपने परिजनों का अंतिम संस्कार कर सकें। सवाल यह है कि आखिर कब तक ग्रामीण इस असुविधा और अपमान का सामना करते रहेंगे और कब प्रशासन उनकी आवाज़ सुनेगा?


