
बिलासपुर। डबरीपारा चांटीडीह के निवासियों ने सामुदायिक भवन के दुरुपयोग और देवांगन समाज को गलत तरीके से दिए जाने के विरोध में कलेक्टर को सौंपा है। मोहल्लेवासियों का कहना है कि करीब 300 परिवारों वाली इस बस्ती में लगभग 1200 लोग रहते हैं और उनकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर शासन ने सार्वजनिक भूमि पर यह सामुदायिक भवन बनवाया था। भवन को चारों ओर से दीवार कर संरक्षित भी किया गया था और पूर्व में यहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का संचालन होता रहा है।स्थानीय नागरिकों ने बताया कि करीब पांच–छह वर्ष पहले इस भवन को देवांगन समाज को कार्यक्रमों के लिए उपयोग में लेने की अनुमति दी गई थी, लेकिन इस बीच समाज के केवल 10–12 परिवार ही डबरीपारा में निवासरत हैं। इसके बावजूद पूरे भवन पर कब्जा कर ताला जड़ दिया गया है और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को बंद करा दिया गया, जबकि मोहल्ले के लोगों को इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।

आरोप है कि देवांगन समाज भवन को व्यावसायिक रूप से किराए पर भी दे रहा है। मोहल्लेवासियों ने शिकायत की है कि बाहर से आने वाले लोग सामुदायिक भवन में कार्यक्रमों के दौरान शराब सेवन, अपशिष्ट भोजन सड़क पर फैलाकर गंदगी फैलाते हैं, जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। इसके अतिरिक्त आए दिन होने वाले आयोजनों के कारण क्षेत्र में शोरगुल, भीड़ और वाहनों की अव्यवस्था बनी रहती है, जिससे डबरीपारा की 1200 की आबादी प्रभावित हो रही है निवासियों का कहना है कि सामुदायिक भवन जनहित के लिए बनाया गया था, लेकिन अब इसका उपयोग सीमित व्यक्तियों के हित में किया जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि भवन को तत्काल देवांगन समाज से वापस लेकर पूर्ववत रूप से आम जनता और सरकारी कार्यों के लिए उपलब्ध कराया जाए।


