चर्च के कब्रिस्तान की जमीन को फर्जीवाड़ा कर बेचने के मामले में भले ही आरोपियों को पुलिस गिरफ्तार नही कर रही है लेकिन सभी आरोपी अपने जमानत के लिए कोर्ट के चक्कर काटकर वहां अपनी जमानत अर्जी लगा रहे है। हालांकि मामले पर गम्भीरता दिखाकर कोर्ट ने भी सभी के जमानत अर्जी को निरस्त कर दिया है। गौरतलब हो कि चर्च ऑफ़ क्राइस्ट मिशनरी इंडिया के कब्रिस्तान के जमीन फर्जीवाड़ा मामले में सिविल लाइन पुलिस ने खरीददार तानाखार के विधायक और विधायक के बेटे सहित अन्य सात विक्रेताओं के खिलाफ अपराध जरूर दर्ज कर लिया है।



लेकिन अब तक इस पूरे मामले में किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। ऐसे में यही प्रतीत होता है कि तानाखार के पूर्व कांग्रेसी विधायक मोहित केरकेट्टा और उसके पुत्र शंकर केरकेट्टा की विधायकी का कार्यकाल जरूर समाप्त हो गया है। लेकिन अब भी उनके विधायकी का रौब समाप्त नहीं हुआ है। शायद यही वजह है कि पुलिस इस मामले में दिलचस्पी नही दिखा रही है और आरोपियों के गिरफ्तारी में भी पुलिस के हाथ पांव कांप रहे हैं। हालांकि इनके अलावा पुष्पा मिंज, दीपक फिलिमोन, जॉन वेसली दास, महावीर कुजूर, अरुण टोप्पो, बिरिम साय टोप्पो और हैमिल्टन थॉमसन इन साथ लोगों ने मिलकर कोर्ट में अपनी जमानत अर्जी भी लगा चुके हैं। लेकिन कोर्ट ने सभी के जमानत अर्जी को निरस्त कर दिया है।शिकायतकर्ता की माने तो वे लोग पुलिसिया कार्रवाई से खुश नही है।क्योंकि अपराध दर्ज करने के बावजूद जिस तरह पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर रही है। पुलिस पर सवाल उठाते हुए शिकायतकर्ता आलोक विल्सन और चर्च ऑफ़ क्राइस्ट के पदाधिकारी सुदेश पॉल लगातार थाना सिविल लाइन के चक्कर भी काट रहे हैं। शिकायतकर्ता चाहते हैं कि क्रेता और विक्रेताओं दोनों के ऊपर सख्त से सख्त पुलिसिया कार्यवाही हो।





