शहर के चांटीडीह स्थित शिव मंदिर परिसर में आने वाले भक्तों को भगवान शिव के दर्शन के साथ-साथ चारों धाम के दर्शन हो जाते हैं। यहां पर महाशिवरात्रि में भव्य मेला भी लगता है। चांटीडीह का यह मंदिर करीबन 110 वर्ष पुराना है। चांटीडीह में लगने वाला मेला अब शहर की पहचान बन चुका है। जहां छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। वही महाशिवरात्रि और सावन के महीनो में यहां पर श्रद्धालुओं की भीड़ भी उमड़ती है। दूर-दूर से श्रद्धालु शिव जी को जल चढ़ाने चांटीडीह मंदिर पहुंचते हैं। सावन के महीने में भोले शंकर की आराधना का महत्व अलग होता है।


देशभर में कई ऐसी जगह है जहां आस्था के साथ ही पुरातात्विक धरोहर का मेल देखने को मिलता है। उन्हीं में से एक चांटीडीह का शिव मंदिर है। जिसकी स्थापना सोनी परिवार के द्वारा की गई थी। शिव मंदिर के साथ-साथ यहां पर श्रद्धालुओं को चार धाम की यात्रा भी करने का सौभाग्य प्राप्त होता है। सोनी परिवार द्वारा उन श्रद्धालुओं को ध्यान में रखकर जो किसी कारणवश चार धाम की यात्रा नहीं कर पाते हैं। उनके लिए यहां चार धाम निर्माण किया गया। ताकि श्रद्धालु एक ही जगह पर चार धाम की यात्रा का दर्शन कर सके। चांटीडीह में स्थित शिव मंदिर में लोग दूर-दूर से दर्शन करने पहुंचते हैं। साथ ही महाशिवरात्रि और सावन के महीने में यहां पर भक्तों का तांता लगा होता है।





