प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत मौसम सूखा बाढ़ आदि प्राकृतिक आपदाओं से किसानों का बहुत नुकसान होता है तो इस स्थिति में फसल को होने वाले नुकसान की क्षतिपूर्ति की जाती है इस योजना के तहत किसानों के नुकसान फसल का भी सरकार सही मूल्य देती है फसल बीमा की अंतिम तारीख 30 जुलाई तय की गई थी लेकिन लक्ष्य के विपरीत किसानो की संख्या 50 फ़ीसदी भी नहीं पहुंची इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि किसान इसमें रुचि नहीं ले रहे हैं।

इस योजना को लेकर किसान और उनसे जुड़ी सहकारी समितियां कितनी उदासीन है इसे इससे भी समझा जा सकता है कि जिले में आधा दर्जन से ज्यादा सहकारी समितियां में फसल बीमा करने वाले किसानों के खाते भी नहीं खुले है जिसको देखते हुए इस योजना से अधिक से अधिक किसानों को जोड़ने के लिए सरकार ने बीमा की अंतिम तारीख को बढ़ाकर 16 अगस्त कर दिया है फसल बीमा करने वाले किसानों की संख्या निराशाजनक रही है इन आंकड़ों को बढ़ाकर छत्तीसगढ़ के किसानों को प्राकृतिक आपदा से बचने के लिए फसल बीमा योजना की तारीख बढ़ा दी गई है।


