बिलासपुर के चांटीडीह में हर वर्ष महाशिवरात्रि में पिछले 110 वर्षों से मेला भरता आया है। जो बिलासपुर की पहचान बन गई है। यह मेला बिलासपुर के अलग-अलग क्षेत्र में प्रसिद्ध है। मेला प्रभारी दयाशंकर सोनी ने बताया कि पुराने समय से चला आ रहा यह मेला अब सिमटता नजर आ रहा है। लोग यहां अतिक्रमण कर बस गए थे जिसकी वजह से मेले की सीमा कम होती चली गई।

हाल ही में यहां पर अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्यवाही की गई है। उन्होंने अपनी मांग रखते हुए बताया कि बेजाकब्जा से जो जमीन खाली हुई है। उसमें मेले के लिए जमीन सुरक्षित कर दी जाए। ताकि ऐतिहासिक धरोहर को जिंदा रखा जा सके। चांटीडीह में भरने वाले इस मेले को पर्याप्त जगह मिल सके। ताकि कल को यह सिर्फ इतिहास बनकर न रह जाए। आने वाली पीढ़ी भी इस वर्षों पुराने पारंपरिक मेले को देख सके।




