पटवारी और तहसीलदार अपनी मांगों को लेकर इन दिनों हड़ताल पर है, परंतु परेशान आम लोगों को होना पड़ रहा है। पटवारी 8 जुलाई से काम बंदकर धरने पर बैठे हैं, तो बुधवार से प्रदेश के 450 से अधिक तहसीलदार और नायब तहसीलदारों ने काम नहीं करने का ऐलान कर दिया, इससे राजस्व का कामकाज पूरी तरह से ठप्प है।



पटवारी पहले से ही अपने 32 सूत्रीय मांग को लेकर हड़ताल में है तो वही बुधवार से तहसीलदार और नायब तहसीलदार भी हड़ताल पर चले गए हैं। तहसीलों में इससे राजस्व का कामकाज पूरी तरह से ठप्प है, तहसीलों में कोई काम नहीं हो रहा तो भीड़भाड़ वाला ऑफिस खाली नजर आया। इससे ग्रामीण, किसान और छात्र काफी परेशान हो रहे हैं, तो वही वकील भी खाली बैठकर हड़ताल खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं।



राजस्व विभाग की रीड कहे जाने वाले पटवारी के हड़ताल में जाने के बाद पहले ही काम प्रभावित हो रहा था तो वही तहसीलदार और नायब तहसीलदारों के मोर्चा खोलने के बाद तो मानो राजस्व विभाग के सारे काम रुक गए हैं। सीमांकन, नामांतरण से लेकर कई मामलों की सुनवाई नहीं हो सकी और तिथि आगे बढ़ाने पर गई लोगों को लौटना पड़ गया। बिलासपुर के किसी भी तहसील में एक भी सुनवाई नहीं हो सकी, इस हड़ताल से जिले के कई तहसील में सन्नाटा पसरा रहा, सीमांकन, नामांतरण, आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, बटवारा सहित 10 से अधिक प्रकार के काम पूरी तरह से प्रभावित हो गए हैं। जिस वजह से तहसील आ रहे ग्रामीणों को निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है।


