डायरिया और मलेरिया का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार की देर शाम तक कोटा के केंदा में तीन और बेलगहना में दो मलेरिया मरीज मिले हैं। इसी तरह रतनपुर में डायरिया के 13 मरीज मिले है, जिनका उपचार किया जा रहा है। कोटा क्षेत्र में दो सप्ताह के भीतर अब तक 100 से ज्यादा मलेरिया पीड़ित मरीज मिल चुके हैं। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि वनांचल क्षेत्र में मलेरिया पूरी तरह से फैल चुका है और तेज गति से लोगों को ग्रसित कर रहा हैं। इसी तरह कोटा से लगे हुए रतनपुर में डायरिया के मरीज मिल रहे हैं।

रतनपुर से अब तक 650 से ज्यादा मरीज मिल चुके हैं और मरीज मिलने का सिलसिला जारी है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की टीमें मलेरिया और डायरिया प्रभावित क्षेत्र में सक्रिय है और सर्वे के साथ ही मोबाइल जांच वैन से मरीज खोजते हुए उपचार करने का काम कर रही हैं। साथ ही लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है लेकिन इसके बाद भी मामले थम नहीं रहे हैं।फिलहाल यह तो साफ हो गया है कि प्रभावित क्षेत्रों में दूषित पानी पीने के चलते ही लोग गम्भीर बीमारियों के चपेट में आये है।



यही वजह है कि अब जिला प्रशासन की जिम्मेदारी हो गयी है कि ग्रामीणो को साफ सुथरा शुद्ध पेयजल की आपूर्ति करायी जाए।हालांकि जब इस सम्बंध में बिलासपुर जिले के सीएमएचओ डॉक्टर प्रभात कुमार से बात की गई तो उन्होंने गोलमोल जवाब देते हुए मलेरिया और डायरिया जिले में कंट्रोल होने की बात कही। वहीं सीएमएचओ ने लोगों से अपील करते हुए ताजा भोजन एवं साफ पानी पीने की सलाह देते हुए पानी साफ करने ग्रामीण प्रभावित क्षेत्रों में क्लोरिन टेबलेट वितरण किये जाने का दावा किया।



