
एसईसीएल के खदान क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण से प्रभावित ग्रामीण लंबे समय से रोजगार और मुआवजा को लेकर अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं। नियमों के अनुसार जिन ग्रामीणों की भूमि खदान विस्तार में शामिल होती है, उन्हें रोजगार तथा निर्धारित मुआवजा प्रदान किया जाना चाहिए। लेकिन हाल के महीनों में कोरबा व गेवरा क्षेत्र के भू-विस्थापित ग्रामीणों ने लगातार यह आरोप लगाया है कि एसईसीएल द्वारा न तो रोजगार दिया जा रहा है और न ही मुआवजा प्रक्रिया में निर्धारित मापदंडों का पालन किया जा रहा है।इसी के विरोध में गुरुवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण एसईसीएल मुख्यालय का घेराव करने पहुंचे।

आंदोलनकारी ग्रामीणों ने मुख्यालय पहुंचकर एसईसीएल प्रबंधन को ज्ञापन सौंपा और अपनी प्रमुख मांगें रखीं—पहली, सभी पात्र भू-विस्थापितों को त्वरित रूप से रोजगार दिया जाए; दूसरी, निर्धारित नियमों के अनुरूप उचित एवं पारदर्शी मुआवजा सुनिश्चित किया जाए। ग्रामीणों ने कहा कि वे वर्षों से समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं, परंतु उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जा रहा है।ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर तत्काल कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन और उग्र रूप लेगा। उनके अनुसार आगामी 11 दिसंबर को गेवरा मुख्यालय का पुनः घेराव किया जाएगा, और यदि तब भी समाधान नहीं मिला, तो खदानों को बंद करने जैसी बड़ी कार्रवाई की जाएगी। आंदोलनकारी ग्रामीणों का कहना है कि संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता।


