रेलवे यात्री सुविधा के साथ-साथ माल ढुलाई का भी सबसे बड़ा साधन है, एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजने के लिए व्यापारी रेलवे के पार्सल वैन का इस्तेमाल करते हैं लेकिन जिस स्थान पर यह सामग्री पहुंचती है, वहां व्यवस्था इतनी खराब है कि जो व्यापारी अपना माल रेलवे के माध्यम से भेज रहा है। उसे नुकसान ही उठाना पड़ता है, जो नजारा आप टीवी स्क्रीन पर देख रहे हैं। यह रेलवे के व्यापार विहार के पास स्थित माल गोदाम का है। सैकड़ो पेटी खाद्य तेल खुले आसमान के नीचे पड़े रहने की वजह से कार्टून के बाहर खुले में बिखरा पड़ा है, हालांकि बाद में व्यापारी के द्वारा इसे समेटने के लिए व्यवस्था की गई लेकिन कहीं ना कहीं रेलवे की लापरवाही इसमें साफ उजागर होती है।

माल परिवहन के लिए राशि लेने के बाद भी सुविधाओं के नाम पर केवल समस्या देना रेलवे की आदत सी बन गई है अब इस खुले आसमान के नीचे पड़े तेल की पेटियों से अगर तेल गायब होता है तो इसकी जिम्मेदारी भी संबंधित व्यापारी की होगी हालांकि रेलवे का कहना है कि अगर यहां से कुछ सामग्री गायब होती है तो उसके लिए व्यापारी रेलवे के पास क्लेम कर सकता है लेकिन सभी को पता है कि सरकारी विभाग में अगर किसी चीज के लिए क्लेम किया जाए तो उसके लिए उसे कितना परेशान होना पड़ता है, ऐसे में व्यापारी खुद ही यहां पहुंचकर अपनी बची हुई सामग्री को समेट कर उसे संबंधित स्थान पर पहुंचने प्रयास कर रहा है। हालांकि अब रेल प्रशासन को चाहिए कि अगर वह व्यापारी से परिवहन के लिए राशि लेता है तो उसे समुचित व्यवस्था भी उपलब्ध कराए। इस तरह खुले आसमान के नीचे व्यापारी की सामग्री से उसे नुकसान होता है जिससे उसके अंदर रेलवे के प्रति रोष भी उत्पन्न हो रहा है।






