भगवान शिव को अति प्रिय सावन मास का आरंभ हो गया है। सोमवार से माह आरंभ होने से इस वर्ष इसे विशेष प्रभावी माना जा रहा है। सावन मास के पहले सोमवार से शिव आराधना आरंभ हो गई है। प्रथम सोमवार को अंचल के सभी शिव मंदिरो में सुबह से ही शिव भक्त पहुंचने लगे। शिव को प्रिय सावन मास पवित्र मानस माना जाता है। वैसे तो इसे पूरे माह ही भगवान शिव की स्तुति की जाती है लेकिन सावन मास के सोमवार शिव जी को अत्यंत प्रिय है। समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को ग्रहण करने के बाद शिव के शरीर में तीव्र ऊष्मा उत्पन्न हुई, जिसे शांत करने के लिए इंद्र ने वर्ष की।



इसी उष्मा को शांत करने के लिए भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाता है। शिव अपने माथे पर चंद्रमा को धारण किए रहते हैं इसीलिए माना जाता है कि शिव को सोमवार भी प्रिय है। यही कारण है कि सावन मास के सोमवार को जल अभिषेक करने से शिव प्रसन्न होते हैं। प्रथम सोमवार को अंचल के सभी प्रमुख शिव मंदिरों में सुबह से ही पूजा अर्चना का क्रम आरंभ हो गया। शिव भक्तों ने मंदिर में पहुंचकर बेलपत्र, धतूरा, आक, पुष्प, दूध, दही पंचामृत आदि अर्पित करते हुए जलाभिषेक किया। वही लोग उपवास रखकर दिनभर शिव स्तुति करते रहे। मान्यता है कि सावन सोमवार का व्रत करने से कुंवारी कन्याओं को भी मनचाहा पति प्राप्त होता है।




