स्कूली बच्चों के भाषा और संख्यात्मक ज्ञान को विकसित करने के उद्देश्य से बुनियादी संख्यात्मक ज्ञान प्रशिक्षण का समापन शनिवार को हो गया। इसमें सरकारी स्कूलों में कक्षा पहली और दूसरी में पढ़ाने वाले शिक्षकों को एफएलएन के अंतर्गत ब्लेंडेंड मोड की ट्रेनिंग दी गई। यह ट्रेनिंग बिल्हा ब्लॉक में तिलक नगर, चकरभाटा और सेमताल में आयोजित हुई। हर साल सरकारी स्कूल में बड़ी संख्या में फेल स्टूडेंट इन प्रशिक्षण शिविर में खर्च किए गए राशि के औचित्य पर प्रश्न चिह्न भी खड़े करते है।

प्राथमिक स्कूलों में बच्चों में भाषा और संख्यात्मक ज्ञान बहुत जरूरी होता है, यही शिक्षा का मूल आधार माना गया है। इसे मजबूत करने शिक्षा विभाग प्रशिक्षण के जरिए टीचरों को प्रशिक्षित कर रहा है। इसके लिए प्रतिवर्ष एफएलएन अर्थात संख्यात्मक बुनियादी साक्षरता ज्ञान का प्रशिक्षण दिया गया। बिल्हा क्षेत्र के शहरी स्कूलों का प्रशिक्षण तिलक नगर के स्वामी आत्मानंद स्कूल में रखा गया। चार दिवसीय प्रशिक्षण का समापन शनिवार को हो गया, इसमें शिक्षकों ने बताया कि बच्चों में भाषा और संख्यात्मक ज्ञान को कैसे विकसित करना है, इसका प्रशिक्षण दिया गया है, जो बच्चों के लिए बहुत उपयोगी होगा। साथ ही शिक्षक भी सरल ढंग से बच्चों को समझाने में पारंगत होंगे।



बिल्हा ब्लॉक के शहरी स्कूलों के शिक्षकों का प्रशिक्षण चार दिन सुबह 10 से शाम 4:00 बजे तक तिलक नगर स्कूल में रखा गया, इसमें 138 शिक्षकों ने भाग लिया, प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले एफ एल एन प्रशिक्षण कार्यशाला को लेकर कहा जा रहा है कि यह केवल औपचारिकता है, शिक्षकों को जो प्रशिक्षण दिया जाता है वह स्कूल में क्रियान्वित ही नहीं करते तभी तो कक्षा एक से पांचवी तक के बच्चों की भाषा और गणित कमजोर होती हैं, इसीलिए हर साल सरकारी स्कूल का रिजल्ट भी कमजोर रहा है। इस वर्ष भी चालीस फीसदी बच्चे फेल हो गए हैं, सरकार इन बच्चों को अच्छी शिक्षा देने तमाम उपाय करती है, प्रशिक्षण के जरिए टीचरों को प्रशिक्षण देने में बड़ी राशि खर्च करती हैं। उसके बावजूद इसका कितना लाभ बच्चों को मिल रहा है, यह तो रिजल्ट बता रहा है। अगर प्रशिक्षण का सही उपयोग किया जाए तो रिजल्ट भी बेहतर होगा और शासन की उन्नत शिक्षा की मंशा में जारी राशि का सही उपयोग होगा।




