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1 जुलाई से 3 नए कानून अस्थित्व में, समारोह के साथ होगी शुरुआत।

1 जुलाई 2024 से भारतीय दंड संहिता आईपीसी अब भारतीय न्याय संहिता बीएनएस होगी। आईपीसी में 511 धाराएं थी लेकिन भारतीय न्याय संहिता में 358 धाराएं होंगी। धाराओं का क्रम बदला गया है। नए क़ानून में डिजिटल साक्ष्यों का महत्व बढ़ाया गया है।

1 जुलाई से देश में नया कानून लागू हो जाएगा। 30 जून रात बारह बजे के बाद जो भी आपराधिक घटनाएं होंगी, उनमें नए कानून के अनुसार प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। नए कानून में वैसे तो बहुत बदलाव हुए हैं, खास बात यह है कि संगीन अपराधो में ट्रायल के दौरान आरोपी डरा-धमकाकर एवं लालच आदि के दम पर समझौता कर लेते हैं और फिर पीड़ित और गवाह मुकर जाते हैं, अब यह आसान नहीं होगा। पुलिस के लिए विवेचना में घटनास्थल पर पहुंचने से लेकर हर कदम पर वीडियो रिकार्डिंग एवं वैज्ञानिक साक्ष्य संकलित करने की बाध्यता और अदालत में ट्रायल के दौरान मजबूत साक्ष्य देना नए कानून मे रहेगा। रविवार को जिले के सभी थानो मे राजपत्रित अधिकारी और थानेदार अपने मातहतो को नए क़ानून की जानकारी मीटिंग मे दी है।

1 जुलाई 2024 से भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) अब भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) होगी। आईपीसी में 511 धाराएं थी लेकिन भारतीय न्याय संहिता में 358 धाराएं होंगी। धाराओं का क्रम बदला गया है। सीआरपीसी (दंड प्रक्रिया संहिता) अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता कहलाएगा। सीआरपीसी में 484 धाराएं थीं। नए कानून में 531 धाराएं होंगी। भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 अब भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के नाम से जाना जाएगा। पुराने अधिनियम में 167 प्रावधान थे। नए में 170 प्रावधान हो गए हैं। इनमें डिजिटल साक्ष्यों का महत्व बढ़ाया गया है।

पुलिस अब तक घटनास्थल पर पहुंचकर साक्ष्य संकलन एवं पब्लिक के किसी भी गवाह के बयान अपने अनुसार लिख लेती थी। मगर अब सब कुछ वीडियो कैमरे की निगरानी में होगा। इससे अदालत में इन साक्ष्यों को झुठलाया नहीं जा सकेगा और न ही उनमें किसी तरह का हेरफेर किया जा सकेगा। नए कानून में सबसे अधिक सुविधा गवाह और वादी को दी गई है। अगर गवाह को सूचना नहीं मिल पा रही है तो वह व्हाट्सएप पर मिलने वाले समन एवं वारंट को भी प्राप्त होना माना जाएगा। अगर वह नहीं आ पा रहा है तो जिस जिले में मौजूद है, वहां के न्यायालय के वीडियो कान्फ्रेसिंग सेंटर से ऑनलाइन गवाही दे सकता है। नए कानून में काफी कुछ बदलाव हुए हैं। इनमें सबसे खास बात यही है कि नए कानून के अनुसार नए मुकदमों का ट्रायल चलेगा जबकि पुराने मुकदमों में पुराने कानून से ट्रायल चलेगा।

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