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72 ट्रेनों के रद्द होने पर बिलासपुर मंडल को कांग्रेस ने ज्ञापन सौंपकर किया विरोध प्रदर्शन।

एक बार फिर से बिलासपुर मंडल की 72 ट्रेनों को रद्द कर दिए जाने से जहां यात्री परेशान है तो वही इस बहाने कांग्रेस को एक मुद्दा मिल गया, जिन्होंने प्रदेश स्तर पर विरोध प्रदर्शन करते हुए ज्ञापन सौंपा।

कोरोना कल से ही भारतीय रेल यातायात व्यवस्था बे पटरी है। खासकर यात्री ट्रेनों का संचालन कभी भी सुचारू रूप से नहीं हो पाया। एक बार फिर एससीआर से गुजरने वाली 72 ट्रेनों को रद्द कर दिया गया और 20 ट्रेनों को परिवर्तित मार्ग से चलाया जा रहा है। इससे यात्री परेशान है, तो वही इसने कांग्रेसियों को बैठे-बिठाए एक मुद्दा दे दिया। क्योंकि सच तो यह है की कोई भी नव सृजन, प्रसव पीड़ा के बगैर संभव नहीं। माना कि इन दिनों यात्रियों को बेहद परेशानी हो रही है, लेकिन यह परेशानी बेवजह नहीं है। वर्तमान में राजनांदगांव- कलमना रेलखंड के बीच तीसरी लाइन का काम चल रहा है, जिस वजह से कई ट्रेनों को रद्द करना पड़ा है या फिर उनकी व्यवस्था बिगड़ी है। कांग्रेसियों का दावा है कि भाजपा सरकार में ही इस तरह की परेशानी सामने आ रही है। यानी वे यह स्वीकार कर रहे हैं कि भाजपा के शासनकाल में ही रेलवे का अभूतपूर्व विस्तार हो रहा है। उनके जमाने में न विस्तार होता था और ना ही इस तरह से ब्लॉक लेने की जरूरत पड़ती थी। तो वहीं उनके विरोध प्रदर्शन पर भी उनकी मंशा के कारण ही सवाल उठ रहे हैं। शनिवार को प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के नेतृत्व में प्रदेश के सभी प्रमुख रेलवे स्टेशनों में पहुंचकर कांग्रेस के नेताओं ने स्टेशन मास्टर को ज्ञापन सौंपा। बिलासपुर में भी कांग्रेस के नेता पहले ज्ञापन सौंपने जोन कार्यालय गए। जब वहां अधिकारी नहीं मिले तो वे डीआरएम कार्यालय पहुंच गए। लेकिन वहां भी अधिकारी कैसे मिलते, क्योंकि इन्होंने विरोध प्रदर्शन के लिए शनिवार का दिन चुना था और शनिवार को केंद्रीय कार्यालय में अवकाश होता है। यानी विरोध प्रदर्शन के लिए दिन चयन में ही कांग्रेसी गलती कर बैठे। जैसे इतना ही अपमान काफी नहीं था। इसके बाद कांग्रेसी बिलासपुर रेलवे स्टेशन पहुंच गए, जिनमें शहर के महापौर रामशरण यादव भी शामिल थे। कांग्रेस सरकार रहते जिस महापौर को लगता था कि वे बहुत बड़ी हस्ती है उन्हें अपने अस्तित्व का पता शायद उसे वक्त चल गया जब रेलवे के सामान्य से स्टेशन मास्टर नित्यानंद ने भी व्यस्तता का हवाला देकर उन्हें घंटो इंतजार करवा दिया।

लंबे इंतजार के बाद कांग्रेसी मुख्य स्टेशन प्रबंधक को रेल मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने में कामयाब हुए। वैसे बात तो कांग्रेस के नेता आम लोगों की सुविधाओं के लिए करते रहे लेकिन अपने अहंकारी स्वभाव के कारण इन्हीं आम लोगों ने कांग्रेस को सत्ता से बाहर बिठा रखा है। लेकिन फिर भी कांग्रेस नेताओं की बदजूबानी गई नहीं है। पत्रकारों के सवाल को पूरा सुनने का धैर्य भी महापौर में नहीं है। आधे अधूरे सवाल को सुनकर ही महापौर रामशरण यादव मीडिया के साथ किस तरह की बदसलूकी कर रहे हैं आप खुद सुनिए।

शायद जुबान की इसी कड़वाहट की वजह से ही कांग्रेस ना तो केंद्र में है और ना ही राज्य में है। अगर महापौर की भाषा शैली ऐसी ही रही तो कुछ महीनो बाद निगम में भी नहीं रहेगी। भाजपा कह रही है कि कांग्रेस को आम लोगों से कोई सरोकार नहीं है। वे तो सिर्फ फोटो खिंचवाने और मीडिया में छपने के लिए ही इस तरह की ड्रामेबाजी करते हैं।

कुल मिलाकर इस दिखावटी प्रदर्शन से कुछ हासिल नहीं होना है। रेलवे अगर यात्री ट्रेनों को रद्द कर रही है तो इससे रेलवे को ही नुकसान हो रहा है और ऐसा इसलिए करना पड़ रहा है कि आने वाले सालों में विस्तारित एवं उन्नत रेल सेवा चलाई जा सके। भाजपा के शासनकाल में ही देश को वंदे भारत एक्सप्रेस की सौगात मिली
अगर सब कुछ अनुकूल रहा तो भारत को बुलेट ट्रेन की भी सौगात मिलेगी, लेकिन विरोध की राजनीति करने वाले चाहते हैं कि भारतीय रेल इस बाबा आदम की जमाने की रेल बनी रहे, जिसमे ना सुविधा होती थी ना ही गति। वर्तमान परेशानियों से उबर कर भारतीय रेल जल्द ही एक न स्वरूप में होगी। मगर इसके लिए कुछ त्याग और सब्र तो जनता को भी करना होगा। लेकिन केवल वोट की राजनीति करने वाले भला क्यों देशहित की बात सोचे। उन्हें तो सिर्फ राजनीति करने के लिए मुद्दा चाहिए। नहीं तो फिर विरोध प्रदर्शन के लिए किसी कार्यालयिन दिवस का ही चयन किया जाता।

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